डीएस कॉलेज बीसीए में हेराफेरी: को-ऑर्डिनेटर से ज्यादा सहायक को भुगतान

कटिहार के डीएस कॉलेज के बीसीए कोर्स में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जहां नियमों के विरुद्ध एक बाहरी सहायक को को-ऑर्डिनेटर और प्राचार्य से अधिक रेम्यूनरेशन दिया जा रहा है. एबीवीपी ने कुलपति से इसकी शिकायत कर जांच की मांग की है.

कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट. पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत डीएस कॉलेज कटिहार में संचालित बीसीए (BCA) कोर्स के रेम्यूनरेशन (मानदेय) भुगतान में एक बड़ी वित्तीय हेराफेरी और मनमानी का मामला सामने आया है. कॉलेज में बाहरी स्तर पर रखे गए एक दैनिक सहायक (असिस्टेंट) को नियम-कानून ताक पर रखकर कोर्स के मुख्य को-ऑर्डिनेटर और खुद कॉलेज के प्राचार्य से भी अधिक राशि का भुगतान किया जा रहा है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रांत सह मंत्री विनय कुमार सिंह ने पूर्णिया विवि के कुलपति को लिखित शिकायत भेजकर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

2007 में शुरू हुआ था कोर्स, अब बीबीए बंद

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीएस कॉलेज में बीसीए और बीबीए (BBA) कोर्स की शुरुआत वर्ष 2007 में व्यावसायिक/व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के रूप में एक साथ हुई थी. हालांकि, कॉलेज प्रबंधन की उदासीनता के कारण महज एक-दो बैच के बाद ही बीबीए में छात्रों का नामांकन बंद हो गया. वर्तमान में यहां सिर्फ बीसीए कोर्स ही संचालित है. चूंकि यह एक ‘स्ववित्तपोषित’ (Self-Financed) कोर्स है, इसलिए इसमें पढ़ने वाले छात्रों से लिए जाने वाले शुल्क से ही शिक्षकों, को-ऑर्डिनेटर, सहायक और चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को रेम्यूनरेशन का भुगतान किया जाता है.

2019 में बिना विश्वविद्यालय के आदेश के बढ़ा दिया सहायक का मानदेय

कोर्स की शुरुआत में रेम्यूनरेशन की दरें बेहद संतुलित थीं. तब को-ऑर्डिनेटर शैलेंद्र कुमार झा को ₹1,000, प्राचार्य को ₹1,000, सहायक को ₹500 और चतुर्थवर्गीय कर्मी को ₹500 प्रति माह मिलते थे. वर्ष 2011 में तत्कालीन बीएनएमयू (भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय) के आधिकारिक पत्र के आलोक में इसमें संशोधन कर को-ऑर्डिनेटर को ₹2,000, प्राचार्य को ₹1,000 और सहायक को ₹1,000 किया गया. लेकिन वर्ष 2019 में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य ने नियमों की अनदेखी करते हुए, बिना विश्वविद्यालय की किसी पूर्व स्वीकृति या आदेश के, बाहरी सहायक का रेम्यूनरेशन अचानक बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया.

वर्तमान में को-ऑर्डिनेटर से ₹1,000 ज्यादा उठा रहा सहायक

वर्तमान में लागू भुगतान प्रणाली के तहत:

  • प्राचार्य को ₹3,000 प्रति माह,
  • को-ऑर्डिनेटर को ₹5,000 प्रति माह,
  • और बाहरी सहायक को ₹6,000 प्रति माह का भुगतान किया जा रहा है.

आश्चर्य की बात यह है कि नियमानुसार बीसीए फंड से किसी भी राशि की निकासी को-ऑर्डिनेटर और प्राचार्य के संयुक्त हस्ताक्षर (जॉइंट सिग्नेचर) से ही होती है, इसके बावजूद इस विसंगति पर ध्यान नहीं दिया गया.

छात्र घटे पर रेम्यूनरेशन बढ़ा, 70 फीसदी राशि हो रही खर्च

बीसीए विभाग के नियमित शिक्षकों का कहना है कि पूर्व में जब कुल 60 सीटों पर शत-प्रतिशत नामांकन होता था, तब वित्तीय घाटे को देखते हुए रेम्यूनरेशन की दरें कम रखी गई थीं. अब जबकि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों का नामांकन ग्राफ काफी नीचे गिर गया है, तब बिना विवि की अनुमति के अवैध रूप से अधिक भुगतान किया जा रहा है. छात्रों से प्राप्त कुल शुल्क का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा केवल कॉलेज विकास और इसी प्रकार के रेम्यूनरेशन के नाम पर खर्च दिखाया जा रहा है.

क्या बोले वर्तमान को-ऑर्डिनेटर?

इस संबंध में बीसीए के वर्तमान को-ऑर्डिनेटर डॉ. आशीष आनंद ने बताया कि उन्होंने महज छह महीने पहले ही इस पद का कार्यभार संभाला है. बाहरी सहायक को को-ऑर्डिनेटर से अधिक रेम्यूनरेशन किस नियम या किसके आदेश से मिल रहा है, ऐसा कोई भी आधिकारिक पत्र फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पूर्व के वर्षों की तुलना में अब कोर्स में छात्रों का नामांकन कम हुआ है.

अभाविप ने उठाई रिकवरी और कानूनी कार्रवाई की मांग

एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री विनय कुमार सिंह ने इस पूरे मामले को वित्तीय अनियमितता का गंभीर उदाहरण बताया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना किसी बाहरी दैनिक कर्मी को संस्थान के मुख्य पदाधिकारियों से अधिक भुगतान करना सीधे तौर पर सरकारी और छात्र कोष का दुरुपयोग है. उन्होंने कुलपति से मांग की है कि मामले की अविलंब जांच कराकर अब तक अवैध रूप से भुगतान की गई अतिरिक्त राशि की रिकवरी (वसूली) की जाए और इसमें शामिल दोषी अधिकारियों पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए.

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Published by: Divyanshu Prashant

Divyanshu Prashant is a contributor at Prabhat Khabar.

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