कटिहार. जिस जमीन पर 25 से 30 साल से बसे हैं, उस जमीन से लाल कार्ड धारियों को अब खदेड़ा जा रहा है. मामला वार्ड नंबर एक मेडिकल कॉलेज कनवा टोला की है, जहां तीन दर्जन से ऊपर परिवार को लाल कार्ड पर बिहार सरकार के द्वारा जमीन मुहैया करायी गयी थी. वर्ष 1991, 1992 वर्ष बीच सभी परिवारों के बीच कुल 62.36 डिसमिल जमीन दिये गये थे, लेकिन अब सभी परिवारों को उक्त जमीन से बेदखल किया जा रहा है. दर्जनों पीड़ित परिवार अपने इस दर्द को लेकर जिला पदाधिकारी से न्याय की गुहार लगा रहे हैं. पीड़ित सावित्री देवी, मानो देवी, सामिया देवी, कारी मोसमत, लक्ष्मी मोसमत, दुवंती मोसमात, मीरा देवी, एतवारी सदा, फूलों देवी, पारो देवी, गुलाबी देवी, धानो देवी आदि ने कहा कि लाल कार्ड पर सरकार के द्वारा हम सभी को वर्ष 1991, 92 में सरकार ने सभी को कनवा टोला में जमीन मुहैया कराया था, लेकिन अब इस जमीन को शहर के बड़ा बाजार रामशरण शाह के द्वारा यह कहकर हम सभी को यहां से भगाया जा रहा है कि उक्त जमीन उनकी है. पीड़ित परिवारों ने कहा कि हम सभी 1991, 92 से ही जमीन हम सबों के कब्जे में है, जहां हम खेती कर रहे हैं, घर बना कर रह रहे हैं. जमीन की रसीद भी कटा रहे थे, लेकिन 2019 के बाद जब जमीन की रसीद कटाने गये तो वहां शून्य दिखाया जा रहा है. पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि यहां के भू माफियाओं से मिलकर जमीन का दावा करते हुए कुछ अंचल पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल रचा गया है. अब हम सभी को जमीन खाली करने की धमकी दी जा रही है. पीड़ित परिवारों ने कहा कि जमीन का दावा करते हुए अपने आप को जमीन का मालिक बताते हुए कुछ लोगों के साथ रात के समय आते हैं. डराते-धमकाते हैं कि जमीन खाली कर दें. सभी परिवारों ने कहा कि भू-माफिया किसी खौफनाक वारदात को अंजाम न दे दे, इसलिए जिला पदाधिकारी इस मामले में संज्ञान ले और हम सभी परिवारों को न्याय दिलाये.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
