डंडखोरा (कटिहार) से संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट. बिहार सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में समयबद्धता और शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार के लाख दावे करे, लेकिन कटिहार जिले के डंडखोरा प्रखंड में इसके उलट तस्वीर सामने आई है. प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था की सुचारू निगरानी और शिक्षकों से जुड़े कार्यों के लिए संचालित प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) के खुलने और बंद होने का कोई समय निर्धारित नहीं रह गया है. मंगलवार को जब दिन के पूर्वाह्न 11:00 बजे बीआरसी कार्यालय का जायजा लिया गया, तो वहां मुख्य चैनल गेट पर ताला लटक रहा था और कार्यालय पूरी तरह बंद था.
हर दिन की यही है कमोबेश स्थिति, शिक्षक व ग्रामीण परेशान
स्थानीय ग्रामीणों और जानकारों की मानें तो डंडखोरा प्रखंड संसाधन केंद्र की यह बदहाली कोई नई बात नहीं है. कार्यालय में कमोबेश हर दिन यही स्थिति बनी रहती है. सुबह के 11 बजे तक कार्यालय न खुलने के कारण दूर-दराज के स्कूलों से अपने विभागीय और प्रशासनिक कार्यों के लिए आने वाले शिक्षकों एवं आम लोगों को घंटों बाहर बैठकर इंतजार करना पड़ता है या निराश होकर वापस लौटना पड़ता है. इस लापरवाही के चलते प्रखंड के शैक्षणिक कार्यों की मॉनिटरिंग पूरी तरह प्रभावित हो रही है.
प्रभार के भरोसे चल रहा है शिक्षा विभाग
उल्लेखनीय है कि डंडखोरा प्रखंड में वर्तमान में किसी स्थाई प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) की तैनाती नहीं है. स्थानीय प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) ही फिलहाल प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के अतिरिक्त प्रभार में हैं. बीडीओ के पास प्रखंड विकास के कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की व्यस्तता होने के कारण वे शिक्षा विभाग को पूर्ण समय नहीं दे पा रहे हैं, जिसका पूरा फायदा बीआरसी के अधीन कार्यरत अन्य कनीय कर्मचारी और समन्वयक उठा रहे हैं. अधिकारियों की अनुपस्थिति और ढुलमुल व्यवस्था के कारण कर्मचारियों की मनमानी चरम पर है. ग्रामीणों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस मामले की जांच कर कार्यालय की समयबद्धता सुनिश्चित कराने की मांग की है.
