– कटिहर पहुंचने पर पॉलिटेक्निक के छात्रों ने किया स्वागत, – भारत के नक्शे पर त्रिशूल व ॐ बनाकर कर रहे अनोखी यात्रा – असम से 2 अप्रैल 2023 से शुरूकर 25 राज्य का कर चुके हैं यात्रा, सिक्किम है अंतिम पड़ाव कटिहार साइकिल से अनोखा यात्रा कर असम के बिपुल कलिता अलग- अलग राज्यों में जाकर शिक्षा व स्वास्थ्य के प्रति अलख जगा रहे हैं. 2 अप्रैल 2023 को असम से साइकिल से कर रहे अनोखी यात्रा के दौरान बुधवार को झारखंड होते हुए कटिहार के भेरिया रहिका पहुंचे. जहां देर रात करीब दस बजे के आसपास के पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों ने उनका जोरदार तरीके से स्वागत किया. इस दौरान उनका रात्रि भोजन का भी व्यवस्था करायी गयी. साइकिल पर भारत के नक्शे पर त्रिशूल व ऊं बनाकर वे बेहिचक इस अनोखा यात्रा कर रहे हैं. ताकि सरकार की नजर में उनके यात्रा का उद्देश्य एवं मांग सामने आ सके. उन्होंने बताया कि पढ़ाई से दूर व स्वास्थ्य से वंचित युवाओं को लेकर वे साइकिल से यात्रा कर सरकार को अवगत कराने का कार्य कर रहे हैं. वे बताया कि उनका लक्ष्य है 18 हजार किलोमीटर यात्रा करना, अब तक वे 17 हजार किलोमीटर 567 दिनों से साइकिल से यात्रा कर चुके हैं. इस दौरान वे करीब 25 राज्यों का भ्रमण साइकिल के माध्यम से कर चुके हैं. उनका अंतिम पड़ाव सिक्किम राज्य है. साथ ही उन्होंने बताया कि उनका मकसद गिनिज बुक ऑफ द वल्ड में नाम दर्ज कराना है. इस दौरान पॉलिटेक्निक के सीनियर छात्र अंशु आर्य, आयुष कुमार, मनीष कुमार, विवेक कुमार, साहिल कुमार, प्रशांत कुमार, अंकित कुमार, अंकेश कुमार के अलावा आसपास के लोगों ने उनको भोजन कराया., जहां कुछ देर विश्राम के बाद वे पूर्णिया के लिए रवाना हो गये. इन राज्यों का कर चुके हैं भ्रमण असम के बिपुल कलिता ने बताया कि अब तक बिहार, बंगाल, यूपी, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दमन महराष्ट्र, कर्नाटक, करेल, तामिलनाडु, तेलांगना, उड़ीसा, अरूणाचल प्रदेश, मेघायल आदि राज्यों का भ्रमण साइकिल से कर चुके हैं. भेरिया रहिका चौक पर रूकने के बाद अपने अनोखे यात्रा एवं उनके उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि गूगल के अनुसार भारत में चार प्रतिशत बच्चे अभी भी पढ़ाई से दूर हैं. पढाई नहीं होने से ऐसे बच्चे अपराधी एवं नशे के आदी हो जाते हैं. ऐसे बच्चों की पढाई की व्यवस्था एवं गांव व शहरों में भटक रहे मानसिक विक्षिप्तों के रहने एवं खाने की व्यवस्था के लिए सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए उन्होंने इस यात्रा को माध्यम बनाया. ताकि सरकार तक उनकी बात पहुंच सके.
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