कटिहार जिले के सीमावर्ती अमदाबाद प्रखंड में गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट का रुख जरूर दर्ज किया जा रहा है, लेकिन पानी उतरने की रफ्तार बेहद धीमी होने से बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें जस की तस बनी हुई हैं.
सैलाब का पानी घटने के बावजूद मुख्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर पानी का बहाव अत्यंत तेज है, जिससे कई संपर्क पथ अब भी जलमग्न हैं. सड़कों पर पानी की तेज धार बहने के कारण लोग जान जोखिम में डालने के बजाय नावों का सहारा लेने को विवश हैं.
आधा दर्जन से अधिक पंचायतें अब भी सैलाब की जद में
प्रखंड क्षेत्र की कई प्रमुख पंचायतों में अब भी बाढ़ की विभीषिका साफ देखी जा सकती है.
दुर्गापुर, चौकिया पहाड़पुर, भवानीपुर खट्टी, परदियारा, दक्षिणी करीमुल्लापुर, उत्तरी करीमुल्लापुर तथा लखनपुर पंचायत के गौरीपुर और जमाई पाड़ा सहित दर्जनों टोलों से बाढ़ का पानी अब तक पूरी तरह नहीं निकल पाया है. घरों और आंगनों में कीचड़ व दूषित पानी भरा होने के कारण इन गांवों के हजारों विस्थापित परिवार अभी भी ऊंचे तटबंधों, विद्यालयों और सुरक्षित स्थानों पर प्लास्टिक की पन्नियां तानकर डटे हुए हैं और पानी सूखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
हरदेव टोला मुख्य मार्ग पर 3 से 4 फीट पानी का तेज बहाव
प्रखंड मुख्यालय को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संपर्कों की हालत सबसे ज्यादा बदहाल है. मुख्यालय से हरदेव टोला की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर वर्तमान में भी तीन से चार फीट पानी की चादर चल रही है.
सड़क पर पानी का बहाव इतना तीव्र है कि किसी भी प्रकार के दोपहिया या तिपहिया वाहन का गुजरना खतरे से खाली नहीं है. इस पूरे मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है और प्रशासन व ग्रामीणों द्वारा आवाजाही के लिए नावों का परिचालन किया जा रहा है.
छोटा रघुनाथपुर घाट से चल रहीं नावें, इन गांवों की थमी रफ्तार
प्रखंड मुख्यालय सह अमदाबाद नगर पंचायत के वार्ड नंबर 9 स्थित छोटा रघुनाथपुर गांव को वर्तमान में प्रमुख नाव घाट बनाया गया है. यहीं से झब्बु टोला, घेरा गांव, मेघु टोला, युसूफ टोला, सूबेदार टोला और आसपास के अन्य सुदूर गांवों के लिए नावों का परिचालन हो रहा है.
दैनिक उपयोग की सामग्री, राशन, दूध और गंभीर मरीजों को अस्पताल लाने के लिए ग्रामीणों के पास नाव के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है. बाढ़ पीड़ितों ने जिला प्रशासन से प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव, शुद्ध पेयजल और पर्याप्त संख्या में सरकारी नावों की व्यवस्था बनाए रखने की गुहार लगाई है.