अमदाबाद में बाढ़ के बीच पेयजल संकट: सामुदायिक रसोई के पास 6 महीने से बंद है वाटर ATM, देखें जमीनी स्थिति

कटिहार जिले के अमदाबाद में बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, और अब शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. लाखों के वाटर एटीएम महीनों से बंद पड़े हैं, जबकि ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

कटिहार जिले के अमदाबाद नगर पंचायत क्षेत्र में लगातार बाढ़ का पानी फैलने से जनजीवन पहले ही अस्त-व्यस्त है, वहीं अब प्रभावित परिवारों के सामने शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. विडंबना यह है कि नगर पंचायत द्वारा लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए शीतल पेयजल एटीएम (Water ATM) पिछले कई महीनों से तकनीकी खराबी के चलते सफेद हाथी साबित हो रहे हैं.

बाढ़ के कारण इलाके के अधिकांश पारंपरिक चापाकल गंदे पानी में समा चुके हैं. ऐसे संकट के समय जब लोगों को शुद्ध पानी की सर्वाधिक दरकार थी, वाटर एटीएम का बंद होना प्रशासनिक उपेक्षा को उजागर कर रहा है.

सामुदायिक रसोई के ठीक बगल में बंद पड़ा है वाटर एटीएम

लापरवाही की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 9, छोटा रघुनाथपुर में देखने को मिल रही है:

  • राहत शिविर के पास बदहाली: यहां बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है, जहां सैकड़ों लोग भोजन के लिए जुटते हैं.
  • 6 महीने से मशीन ठप: इसी रसोई के ठीक बगल में स्थापित शीतल पेयजल एटीएम पिछले 5-6 महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा है. रसोई में आने वाले बाढ़ पीड़ितों को भी पीने का साफ पानी मयस्सर नहीं हो रहा है.

डूबे चापाकलों का दूषित पानी पीने की मजबूरी: संक्रामक बीमारियों का खतरा

पेयजल के अभाव में ग्रामीणों की जान जोखिम में पड़ गई है:

  • दूषित पानी का सेवन: बाढ़ के पानी में डूबे चापाकलों से रिसकर निकल रहे दूषित व बदबूदार पानी को पीने के लिए ग्रामीण विवश हैं.
  • स्वास्थ्य पर संकट: डॉक्टरों व जानकारों के अनुसार, बाढ़ के गंदे पानी के सीधे इस्तेमाल से इलाके में डायरिया, हैजा, टायफाइड और पेट से जुड़ी अन्य गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने की प्रबल आशंका बन गई है.

'रूखा-सूखा खा लेंगे, लेकिन पानी के बिना कैसे जिएं?'—ग्रामीणों का दर्द

स्थानीय ग्रामीण प्रेमचंद ऋषि और महेंद्र कुमार ने अपनी व्यथा बयां करते हुए बताया कि जब यह वाटर एटीएम लगा था, तब कुछ दिनों तक ही इससे शुद्ध पानी मिला. उसके बाद तकनीकी खराबी आई और फिर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली.

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के इस मुश्किल वक्त में रूखा-सूखा खाकर किसी तरह गुजारा किया जा सकता है, लेकिन बिना शुद्ध पानी के जिंदगी बचाना मुश्किल हो रहा है.

अविलंब मरम्मत और टैंकर से जलापूर्ति की मांग

बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कटिहार जिला प्रशासन और नगर पंचायत कार्यपालक पदाधिकारी से मांग की है कि:

  • बंद पड़े सभी वाटर एटीएम को युद्ध स्तर पर मैकेनिक बुलाकर तत्काल दुरुस्त कराया जाए.
  • जब तक मशीनें चालू नहीं होतीं, तब तक प्रभावित वार्डों और सामुदायिक रसोई केंद्रों पर पानी के टैंकरों के जरिए नियमित शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

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By Prabhat khabar news desk

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