कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक अजीबोगरीब और चौंकाने वाली जमीनी हकीकत सामने आई है. पूर्वी करीमुल्लापुर पंचायत के पहाड़पुर बांध से बैरिया पंचायत को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही देखने को मिल रही है. यहां लाखों रुपये की लागत से एक शानदार पुल और एप्रोच रोड तो बनाकर खड़ा कर दिया गया, लेकिन उस पुल तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क ही नहीं बनाई गई.
पुल बनकर तैयार, लेकिन सड़क बनाना ही भूल गया विभाग
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पुल का निर्माण हुए अरसा बीत चुका है, लेकिन महानंदा बांध से इस पुल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का निर्माण कराना विभाग भूल गया है:
- निजी जमीनों के रहमोकरम पर जनता: सड़क न होने के कारण पूर्वी करीमुल्लापुर पंचायत के 4 वार्डों और बैरिया पंचायत के हजारों लोगों को रोजाना दूसरों की निजी जमीनों और खेतों से होकर गुजरना पड़ता है.
- आए दिन होता है विवाद: निजी खेतों से गुजरने के कारण अक्सर भू-स्वामियों और राहगीरों के बीच तीखी बहस और विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है.
बरसात में नारकीय हो जाती है स्थिति, कट जाता है संपर्क
पूर्व मुखिया प्रतिनिधि मसौवर आलम तथा स्थानीय ग्रामीण मकसूदुद्दीन, शेख अजीम, जावेद, राजीक, मुस्तकिम और नजरुल ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया:
ग्रामीणों का बयान: "बरसात के दिनों में इस इलाके की स्थिति बेहद नरक जैसी हो जाती है. खेत पानी और कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे दोनों पंचायतों के दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य बाजार और प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह कटने की नौबत आ जाती है. आपातकालीन स्थिति में मरीजों और स्कूली बच्चों को ले जाना बेहद जोखिम भरा होता है."
दशकों से लगा रहे गुहार, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मुख्य सड़क के निर्माण के लिए दशकों से संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन हर बार सिर्फ खोखले आश्वासनों का पुलिंदा ही मिला.
लगातार हो रही प्रशासनिक उपेक्षा से अब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट चुका है. उग्र ग्रामीणों ने जिला प्रशासन कटिहार से मांग की है कि:
- महानंदा बांध से पुल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का अधिग्रहण कर तत्काल निर्माण कार्य शुरू कराया जाए.
- जनहित की इस समस्या का स्थाई समाधान किया जाए ताकि लोगों को दूसरों की जमीनों पर निर्भर न रहना पड़े.
