कटिहार : कटिहार रेल मंडल का एक मात्र रेलवे अस्पताल ओटीपाड़ा क्षेत्र में अवस्थित है. इसमें मरीजों के लिए सुविधाओं का नाम पर साधारण रोगों के उपचार को छोड़ कर और किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है. इमरजेंसी में मरीजों को एनजेपी रेलवे अस्पताल रेफर कर दिया जाता है.
ज्ञात हो कि जहां कटिहार के अन्य अस्पतालों, क्लिनिकों, सदर अस्पताल व नर्सिंग होम में रोगी परचा कटाकर घंटों कतारों में खड़े होकर अपना इलाज करवाने को विवश होते है. वहीं रेलवे अस्पताल में दिनों दिन मरीजों की संख्या घटती जा रही है. इसका एक मात्र कारण यह है कि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं हो रही है. इसके कारण लोग निजी अस्पताल या दूसरे सरकारी अस्पताल में इलाज कराने को विवश हो रहे हैं. गौरतलब हो कि करोड़ों की लागत से रेलवे अस्पताल का भव्य भवन बनाया गया है. जहां प्रत्येक माह लाखों रुपये चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, दवा आदि के नाम पर रेलवे का खर्च हो रहा है लेकिन यहां मरीजों का टोटा है. ऐसे में रेलवे अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है.
रेलवे अस्पताल में नहीं है मूलभूत सुविधा : रेलवे अस्पताल में मरीजों को मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल पा रहा है. जहां रेलवे के अन्य डिवीजनों में मरीजों को दिनों दिन सुविधाओं के लिए रेल प्रशासन व अस्पताल प्रशासन प्रयासरत है. अन्य अस्पतालों में मरीजों के हरेक बेड पर ऑक्सीजन पाइप, इलेक्ट्रिक स्विसटच बोर्ड, सामान रखने के लिए
छोटे टेबल आदि सुविधाएं मरीजों को दिया जाता है. डॉक्टर अपने रूटीन में कम से कम दो बार मरीजों को हरेक दिन चेक करते है. जिससे अस्पताल प्रबंधन की मरीजों के प्रति सजगता दिखती है. लेकिन कटिहार रेलवे अस्पताल का यह हाल है कि रविवार को सुबह से शाम तक मरीजों की हालत पूछने वाला तक कोई नहीं आता है. इससे इलाज करवाते मरीज अस्पताल प्रबंधन के लिए रोष की भावना उत्पन्न हो रही है.
रेलवे अस्पताल में धीरे-धीरे घट रही है मरीजों की संख्या : कभी कटिहार रेलवे अस्पताल अपने सुविधा व इलाज के लिए जाना जाता था. लेकिन धीरे-धीरे अस्पताल प्रबंधन व रेल प्रशासन की उदासीनता की वजह से कटिहार रेलवे अस्पताल अपनी गरिमा खोता जा रहा है. नाम नहीं छापने की शर्त पर अस्पताल में भरती रेल कर्मचारी ने कहा कि रविवार को सभी डॉक्टर छुट्टी पर चले जाते हैं. इससे मरीजों की हालत की जानकारी लेने वाला कोई नहीं रहता है. और इमरजेंसी वार्ड में रहने वाले डॉक्टर इस वार्ड में आते नहीं है.
उनके कथनी के अनुसार आज से 20-30 साल पहले इस अस्पताल की हालत बहुत अच्छी थी. जिससे रेल कर्मचारी के साथ-साथ कटिहार वासी भी अपना इलाज करवाते थे. लेकिन अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता के कारण दिनों दिन अस्पताल में मरीजों की संख्या घटती जा रही है. वे लोग यहां आने से बेहतर कोई अन्य क्लिनिकों में ही अपना इलाज करवाना बेहतर समझते है.
आनन-फानन में किया जा रहा है अस्पताल को चमकाने का काम : आगामी 23 फरवरी की रेल महाप्रबंधक चाहते राम के आगमन को लेकर रेल अस्पताल प्रबंधन द्वारा आनन-फानन में अस्पताल का कोना-कोना चमकाने का कार्य कर रहा है. इससे की साहब के खिदमत में कोई कमी नहीं रह जाये. लेकिन इस आनन-फानन द्वारा किया गया कार्य में गुणवत्ता में घोर कमी हो रही है. ऐसा लगता है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा केवल खानापूर्ति का काम किया जा रहा है.
लाखों रुपये प्रत्येक माह हो रहे खर्च रेल प्रशासन की ओर से डॉक्टरों को िमलती है मोटी रािश
रेल प्रशासन व रेल अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता की वजह से रोगियों की आने की संख्या में दिनों दिन गिरावट हो रही है. जिससे रेल कर्मचारी व कटिहार वासी अपने बेहतर इलाज के लिए दूसरा विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे है, या जो मरीज इलाज के लिए रेलवे अस्पताल पहुंच भी जाते हैं तो बेहतर इलाज को नहीं देखकर अपना इलाज दूसरे अस्पतालों में करवाना ही सही समझते है. लेकिन रेल प्रशासन के द्वारा दिनों दिन रेल अस्पतालों में कार्यरत अस्पताल कर्मी व डॉक्टरों की सुविधा बढ़ते ही जा रही है.
रेल प्रशासन द्वारा अस्पताल कर्मी के लिए अच्छे रहने की व्यवस्था से लेकर अच्छे वेतन को भी देते है. लेकिन दिनों दिन मरीजों की संख्या घटने अस्पताल कर्मी बैठे-बैठे रेल पैसे का उपभोग कर रहे है. इस तरह से रेल प्रशासन द्वारा दिया गया सुविधा व डॉक्टरों को दिया गया महीनो लाखों का वेतन बेकार होते जा रहा है. रेल कर्मी व कटिहार वासी इलाज करवाने के लिए आते तो है लेकिन सुविधाओं के अभाव को देखकर मजबूरन अन्य क्लिनिकों में अपना इलाज करवाते है. जिससे इलाज के क्रम में इन्हें काफी ज्यादा पैसे खर्च करना पड़ता है.
कहते हैं मुख्य
चिकित्सा अधीक्षक
रेलवे अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक मुकेश चौधरी ने बताया कि मरीजों को सभी तरह की सुविधा दी जा रही है. इसमें किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं हो रही है. मरीजों की संख्या कम क्यों हो रही है, बेड क्यों खाली रह जा रहे हैं, इस सवाल से वे बचते रहे. बस इतना कहा कि मालीगांव हेड क्वार्टर से इसका संचालन होता है. वहीं से जानकारी प्राप्त हो सकती है.
