फलका : इस भागमभाग के दौर में आज पर्यावरण संतुलन की फिक्र किसी को नहीं है. हालांकि ये बात और है कि सरकार ने इस दिशा में ढेर सारी योजना चला रखी है. लेकिन सरकार के भरोसे सब कुछ छोड़ देना कहां की अक्लमंदी है.
उक्त बातें फलका प्रखंड के 55 वर्षीय कपिलदेव मंडल ने कही. उनके अंदर पौधा लगाने का जुनून है, जो सचमुच काबिले तारीफ है. यह कार्य करने के पीछे उनका मकसद इनाम पाना या शोहरत बटोरने नहीं बल्कि रोग मुक्त समाज बनाना है. पर्यावरण को संरक्षण करना है. यही कारण है कि पिछले कई वर्षों से वे लड़की के जन्म और शादी में उपहार स्वरूप पौधा देकर पर्यावरण संतुलन का संदेश बांटते हैं. इसके आलावा अब तो गांव-गांव घूम-घूम कर मुफ्त पौधा बांटते हैं. पौधा ले लो, पौधा लगा लो और खुद को बचा लो उनका मूल मंत्र बन चुका है. उनका कहना है कि जब तक उनके हाथ-पैर चल रहे हैं. वे पौधे लगाने के अपने काम को नहीं छोड़ेंगे.
यही कारण है कि आज उनके गांव में सैकडों पेड़ लहलहा रहे हैं. कपिल देव ने न केवल अपने खेतों की मेढ़ पर बल्कि सरकारी जमीन पर भी बड़ी संख्या में पौधे लगाये हैं. जो आज पेड़ बन गये हैं. वे ज्यादातर पौधे नीम, आम, कदम या इसी तरह ज्यादा छांव देने वाले और पर्यावरण के लिए अनुकूल पौधे ही लगाते हैं. जहां भी वे पौधे लगाते हैं उसे पूरी गर्मी पानी देने का जिम्मा भी स्वयं ही उठाते हैं.
उनके बच्चे उन्हें इस कार्य में मदद करते हैं. उनके इस जज्बे को सब सलाम करते हैं. उनका कहना है कि यह पुण्य का काम है और इसमें परिवार वाले रोड़ा नहीं बनेंगे. पर्यावरण बचाने का सबसे अहम और सरल उपाय है. ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाकर पेड़ बनाओ. मेरा युवाओं से कहना है कि वे अपने परिवार में किसी भी एक व्यक्ति जिसे वे सबसे ज्यादा चाहते हैं. उसके नाम से एक पौधा जरूर लगाकर उसकी सुरक्षा करें. प्रकृति में पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ गया है
जो केवल और केवल पौधे लगाने से ही ठीक हो सकता है. अब तो उन्होंने खुद का नर्सरी बना डाला है. शेष समय में मजदूरी भी करते है. ताकि परिवार का भरण पोषण हो सके. गांव के उपेन्द्र मंडल, चन्दन कुमार, अवधेश मंडल ने कहा कि कपिल देव मंडल का गरीब मजदूर होते हुए भी यह कदम काफी सराहनीय है. सरकार और प्रशासन को उसकी हौसला अफजाई करना चाहिए. ताकि आमलोग भी इस कार्य को मकसद बना लें.
