कटिहार : जिले में बाढ़ को लेकर संचालित हो रहे अधिकांश राहत शिविरों को बंद कर दिया गया है. इसके कारण बाढ़ पीड़ितों के समक्ष भोजन के लाले पड़ गये हैं. हाल यह है कि महानंदा के बाढ़ से सब कुछ गंवा चुके बाढ़ पीड़ित दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं. उन्हें दो वक्त का भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है, जबकि सरकार ने घोषणा की थी कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, राहत शिविर का संचालन होता रहेगा. बाढ़ पीड़ितों को भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जायेगा.
पर, बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही एक साथ राहत शिविरों को बंद कर दिया गया है. इससे बाढ़पीड़ित व उनके बच्चे, महिलाएं भूख से बिलबिला रहे हैं. जिले में मात्र 13 राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है, जबकि 155 सामुदायिक रसोई घर संचालित करने का दावा किया जा रहा है. बाढ़ के समय 150 राहत शिविर एवं 700 सामुदायिक रसोई घर का संचालन किया जा रहा था. प्रभात खबर की टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर जायजा लिया, तो अधिकांश जगहों पर राहत शिविर बंद मिला. सामुदायिक रसोई घर का भी संचालन के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभायी जा रही है.
कई स्थानों पर सिर्फ कागजों पर ही राहत कैंप का संचालन हो रहा है. गौरतलब हो कि राहत शिविर एवं सामुदायिक किचन में पका पकाया भोजन प्रभावित परिवारों को दिन में एक समय ही दिया जा रहा है. राहत शिविर का संचालन मानक के अनुरूप नहीं हो रहा है. उसी तरह की स्थिति सामुदायिक किचन की भी है. प्रभावित परिवारों में सबसे खराब स्थिति महिलाओं एवं बच्चों की है. छोटे-छोटे बच्चों को दूध भी नसीब नहीं हो रहा है. यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री के आगमन के दिन कदवा के एकमात्र राहत शिविर में एक टाइम बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की गयी थी. मुख्यमंत्री के आने की वजह से चांदपुर के शिविर में लोगों को 2-3 टाइम भोजन भी मिला. पर अन्य राहत शिविरों की स्थिति ऐसी नहीं रही. बाढ़ आने के बाद से अब तक कुल 150 राहत शिविर एवं 700 सामुदायिक रसोईघर संचालित किये जाने का दावा जिला प्रशासन ने मंगलवार को किया. जायजा लेने के क्रम में हमारी टीम ने आजमनगर के धूमनगर, चौलहर, पैघवान, बधोरा, खोपडा, रोहिया, सीतलपुर, धबोल, सिकटिया, कदवा प्रखंड के मीनापुर, मंझोक, भौनगर, तेतलिया में बाढ़ से भारी तबाही देखी. वहां बड़ी संख्या में लोग बेघर हैं. बाढ़पीड़ितों के घर में एक दाना भी नहीं बचा है. खाना बनाने के उपकरण से लेकर, कपड़ा, बर्तन सहित सभी सामान बाढ अपने साथ बहा ले गयी है. सैकड़ों कच्चे घर बाढ़ में गिर गये हैं या बह गये हैं. वैसे स्थानों पर भी राहत शिविर को बंद कर दिया गया है. ऐसे में प्रभावित परिवार भूखे पेट सोने को विवश हो रहे हैं.
