Varanasi Aurangabad Six Lane Project: वाराणसी-औरंगाबाद सिक्सलेन सड़क का निर्माण कार्य 15 वर्षों के बाद भी पूरा नहीं होने के कारण लोग बहुत परेशान हो रहे हैं. टोल टैक्स में हर साल बढ़ोतरी कर दी जाती है, लेकिन लोगों के आरामदायक सफर का सपना अब तक साकार नहीं हो पाया है. इसी सड़क से होकर रोहतास और कैमूर जिले के हजारों लोग प्रतिदिन वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों तक आते-जाते हैं. इस कारण यह सड़क स्थानीय लोगों के साथ-साथ राज्यभर के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है.
दुर्गावती में डहला मोड़ और मरहिया के पास आज तक अंडरपास या ओवरब्रिज का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है. इसके कारण यहां अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. दुर्गावती बाजार में भी ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है. इसके साथ ही कुलहड़िया, दुर्गावती बाजार सहित कई जगहों पर सर्विस लेन का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे इन क्षेत्रों में सर्विस रोड से वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है.
2011 में शुरू हुआ था सिक्स लेन का काम
2011 में एनएच-2 का विस्तार कर फोरलेन से सिक्सलेन बनाने का काम शुरू किया गया था. इसे वर्ष 2014 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन समय पर कार्य पूरा नहीं हो सका. उस समय इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2848 करोड़ रुपये थी. कार्यदायी संस्था निर्धारित समय पर निर्माण कार्य पूरा करने में असफल रही. इसके बाद कार्य अवधि बढ़ाकर वर्ष 2017 तक कर दी गयी.
उस समय जमीन अधिग्रहण की समस्या के कारण भी परियोजना के निर्माण में बाधा आ रही थी, जिसके चलते एक बार फिर समय सीमा बढ़ानी पड़ी. समय बढ़ने के साथ-साथ परियोजना की लागत में भी लगातार बढ़ोतरी होती गयी. सीमेंट, बालू, छड़ व गिट्टी जैसे निर्माण सामग्रियों के दाम बढ़ने से लागत भी बढ़ती चली गयी, लेकिन कई हिस्सों में काम अब भी अधूरा पड़ा है.
वाराणसी से औरंगाबाद के बीच बनाये गये तीन टोल प्लाजा
वाराणसी से औरंगाबाद के बीच 192 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर वाराणसी, मोहनिया और सासाराम में तीन टोल प्लाजा बनाये गये हैं. इन टोल की दर भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गयी है और लगभग दोगुने के करीब पहुंच गयी है. दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाली इस व्यस्त सड़क को पहले जीटी रोड व एनएच-2 के नाम से जाना जाता था, जिसे अब एनएच-19 कर दिया गया है.
इस परियोजना का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि करीब 2848 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट तीन वर्षों में पूरा होना था, लेकिन 15 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष टोल टैक्स की दर बढ़ा दी जाती है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं होता. 2011 से लेकर 2026 तक टोल टैक्स की दरों में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि सिक्सलेन सड़क का निर्माण अब भी अधूरा है.
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2025 तक निर्माण पूरा होने का दावा फेल
एनएचएआइ के अधिकारियों द्वारा पिछले वर्ष 2025 तक सिक्सलेन का निर्माण कार्य पूरा होने का दावा किया गया था. लेकिन वर्ष 2026 के मार्च माह तक भी जमीन पर काम पूरा होता नहीं दिख रहा है. कई जगहों पर सर्विस लेन का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे इस वर्ष भी लोगों के सुहाने सफर का सपना अधूरा ही नजर आ रहा है. निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण सड़क पर आये दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, जिससे लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है.
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