अधौरा प्रखंड में शिक्षकों की मनमानी चरम पर, जांच में बंद मिले स्कूल

KAIMUR NEWS.सरकार व शिक्षा विभाग भले ही व्यवस्था सुधारने के लिए सख्ती बरत रहे हों, लेकिन कैमूर जिले के दुर्गम अधौरा प्रखंड में हालात चिंताजनक बने हुए हैं. वन क्षेत्र से घिरे इस इलाके में शिक्षकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है. दरअसल विभाग ने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इ-शिक्षा पोर्टल लागू किया है.

बीडीओ की जांच में मामले का हुआ खुलासा,डीपीओ स्थापना ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

नेटवर्क की कमी बना बहाना, घर बैठे वेतन लेने का आरोप

दो दिनों के अंदर जवाब नहीं देने पर होगी निलंबन की कार्रवाई

प्रतिनिधि, भभुआ नगर.

सरकार व शिक्षा विभाग भले ही व्यवस्था सुधारने के लिए सख्ती बरत रहे हों, लेकिन कैमूर जिले के दुर्गम अधौरा प्रखंड में हालात चिंताजनक बने हुए हैं. वन क्षेत्र से घिरे इस इलाके में शिक्षकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है. दरअसल विभाग ने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इ-शिक्षा पोर्टल लागू किया है. इसके तहत विद्यालय में इन व आउट के समय ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य की गयी है. पर, अधौरा में नेटवर्क की कमी का हवाला देकर इस व्यवस्था को प्रभावहीन बना दिया गया है. लंबे समय से स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगते रहे हैं कि शिक्षक विद्यालय आये बिना ही वेतन उठा रहे हैं. अब प्रखंड विकास पदाधिकारी के निरीक्षण में यह आरोप सही साबित होता दिख रहा है. बीते तीन फरवरी को बीडीओ अधौरा ने प्राथमिक विद्यालय सलैया व उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोरदाग का निरीक्षण किया था. निरीक्षण के दौरान दोनों विद्यालयों में ताले लटके मिले. प्रधानाध्यापक सहित सभी शिक्षक अनुपस्थित पाये गये. इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए बीडीओ ने डीपीओ स्थापना को पत्र भेजकर दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व कार्यरत शिक्षकों पर कार्रवाई की अनुशंसा की है. पत्र में उल्लेख किया गया है कि निर्धारित समय पर विद्यालय बंद मिलना कर्तव्यहीनता का स्पष्ट प्रमाण है.

दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को कारण बताओ नोटिस जारी

बीडीओ के पत्र के आलोक में डीपीओ स्थापना शंभू कुमार सिंह ने त्वरित संज्ञान लेते हुए दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि पत्र प्राप्ति के दो दिनों के भीतर प्रधानाध्यापक सहित सभी शिक्षक अपना स्पष्ट स्पष्टीकरण दें. निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई की जायेगी.जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नेटवर्क की कमी को विद्यालय बंद रखने या अनुपस्थित रहने का आधार नहीं माना जायेगा. विभाग का मानना है कि दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि वहां शिक्षा का एकमात्र सहारा सरकारी विद्यालय ही हैं. मामला सामने आने के बाद अधौरा प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा.

दो दिनों में जवाब नहीं मिला, तो निलंबन : डीपीओ स्थापना

इस संबंध में डीपीओ स्थापना शंभू कुमार सिंह ने बताया कि समय पर विद्यालय नहीं आने व ड्यूटी से गायब रहने वाले शिक्षकों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. बीडीओ की जांच में प्राथमिक विद्यालय सलैया व उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोरदाग बंद मिले. प्रधानाध्यापक सहित सभी शिक्षक अनुपस्थित पाये गये. दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व शिक्षकों को स्पष्टीकरण नोटिस भेजा गया है. यदि दो दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो निलंबन की कार्रवाई करते हुए विभागीय प्रक्रिया अपनायी जायेगी.

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By VIKASH KUMAR

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