भभुआ नगर पर्षद को नहीं पता, कितनी हैं शहर में मीट-चिकन की दुकानें = जानकारी मांगे जाने पर हरकत में आया नगर प्रशासन, शुरू हुई गिनती भभुआ में सरकार के आदेश की अनदेखी, खुले में मीट बेचने पर रोक के बावजूद सुस्त पड़ा प्रशासन भभुआ सदर. बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने पिछले 17 फरवरी से राज्य भर में बगैर लाइसेंस और खुले में मीट और चिकन बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. डिप्टी सीएम के आदेश पर जिले के सभी नगर निकायों में कार्रवाई शुरू हो गयी है, लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह कि जिले के सबसे बड़े नगर निकाय भभुआ नगर पर्षद में ही यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि शहर में कितने मीट और चिकन बेचने वाले दुकानदार है. जब नगर प्रशासन से इसकी जानकारी मांगी गयी, तो अधिकारियों को जानकारी ही नहीं थी कि शहर में कहा-कहा और कितने मांस व मीट की दुकानें है और वैसी दुकानें सरकार के बनाये नियमों का पालन कर रही है कि नहीं. हालांकि जानकारी मांगे जाने के बाद नगर प्रशासन हरकत में आया और फिर मीट-मांस बेचने वालों की जानकारी इकट्ठी की जाने लगी और वैसे दुकानदारों को लाइसेंस लेकर ही धंधा करने का निर्देश दिया जा रहा है. सोमवार को इसको लेकर नगर पर्षद के सिटी मैनेजर सोनू कुमार सिंह द्वारा मीट व चिकन दुकानदारों को नोटिस भी थमाया गया है. = सिर्फ पर्दा लगाकर मांस व चिकन बेचने की खानापूर्ति दरअसल, बगैर लाइसेंस और खुले में मांस बेचने पर लगे प्रतिबंध से पूर्व तक भभुआ शहर के चारों तरफ यानी सब्जी मंडी, एसडीएम आवास के समीप, वन विभाग के सामने, देवी मंदिर रोड, पूरब पोखरा, जिला समाहरणालय के समीप व अखलासपुर बस स्टैंड के पास आदि जगहों पर बिना लाइसेंस और व्यवस्था के ही मीट-मांस की दुकानें खुली हुई थी. जहां मानकों का प्रयोग नहीं किया जा रहा था. इसके चलते आम राहगीर भी परेशान थे. हालांकि, सरकार के प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद शहर में व्यवस्था नहीं सुधर सकी है और अभी भी खुले में ही काले शीशे की जगह कपड़े का पर्दा लगाकर मांस और चिकन बेचने की खानापूर्ति की जा रही है. शहर के रहनेवाले शैलेश मिश्रा, रामबदन जायसवाल आदि का कहना था कि सरकार के प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. देवी जी रोड, एसडीएम आवास के समीप, वन विभाग आदि जगहों पर अभी भी खुले में मीट और चिकन बेचे जा रहे है. दिखावे के लिए आगे पर्दा लगा दिया गया है, जो हवा से उड़ती रहती है. शहर में नगर पर्षद मानकों का पालन कराने में सुस्ती बरत रही है. = मांस बेचने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी गौरतलब है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम, 2007 की धारा 345 के तहत अब केवल लाइसेंसधारी दुकानदार ही मीट व चिकन बेच सकेंगे. दुकानों को पर्दे या शीशे से ढकना अनिवार्य होगा. सड़क किनारे या खुले में मीट लटकाकर बेचने पर रोक लगा दी गयी है. यह भी निर्देश दिया गया है कि मांस बेचने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा. काला शीशा लगाने का निर्देश दिया गया है, ताकि बाहर से न दिखे. नियमों का उल्लंघन करने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दुकान बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा बिहार नगर पालिका अधिनियम, 2007 के तहत उल्लंघन करने पर जुर्माना, माल की जब्ती और दुकानों को बंद करने सहित कई दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है. अधिकारियों को सभी मांस और मछली की दुकानों का निरीक्षण करने, लाइसेंसों का सत्यापन करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं.
बगैर लाइसेंस व खुले में मीट व चिकन बिक्री पर प्रतिबंध, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
भभुआ नगर पर्षद को नहीं पता, कितनी हैं शहर में मीट-चिकन की दुकानें
