दंत चिकित्सा व एक्सरे की सुविधा है, पर डॉक्टर न होने से मरीज रेफर होने को मजबूर महिला डॉक्टर नदारद, पुरुष चिकित्सक की देखरेख में एएनएम के भरोसे हो रहा प्रसव रामपुर. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर में आये दिन मौसम की बेरुखी से सैकड़ों मरीज बीमार होकर इलाज कराने आ रहे हैं. वर्तमान में यह केंद्र स्वयं चिकित्सकों की कमी की मार झेल रहा है. ऐसा कहना इसलिए उचित है क्योंकि यह अस्पताल मात्र तीन चिकित्सकों के सहारे चल रहा है. उसमें भी डॉक्टर अनिल चैनपुर से प्रतिनियुक्ति पर सप्ताह में केवल एक दिन (गुरुवार) बैठते हैं. वहीं, डॉक्टर अक्षय कुमार सप्ताह में दो दिन ओपीडी करते हैं. मात्र एक प्रभारी डॉक्टर रमेश कुमार शेष दिनों में ओपीडी व 24 घंटे इमरजेंसी सेवा देखते हैं. एक तरफ बिहार सरकार राज्य में आम लोगों को बेहतर व सुलभ चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गरीबों व असहायों को जीवन देने वाला यह केंद्र स्वयं लाचार है. अस्पताल में दंत चिकित्सा व एक्सरे जांच सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, परंतु विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं. महिला चिकित्सक न होने के कारण नारी सशक्तीकरण की बातें बेमानी लगती हैं. चिकित्सकों के अभाव में मरीजों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें रेफर कर दिया जाता है. बता दें कि 30 बेड वाले इस स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर रमेश कुमार भी प्रतिनियुक्त प्रभारी हैं. अस्पताल में चार एएनएम हैं, परंतु एक भी जीएनएम नियुक्त नहीं है. दुर्भाग्य यह है कि प्रसव कराने आयी महिलाओं का भविष्य इन्हीं एएनएम के हाथों में है व पुरुष डॉक्टर की निगरानी में प्रसव कराया जाता है. प्रखंड की दो लाख से अधिक आबादी की जिम्मेदारी एक प्रभारी पर होना चिंताजनक है. स्वीकृत पद चार से पांच होने चाहिए, परंतु यहां मात्र तीन डॉक्टर प्रतिनियुक्त हैं, जिनमें से दो केवल ओपीडी कर चले जाते हैं. रामभरोसे जच्चा-बच्चा का भविष्य प्रखंड क्षेत्र से आयी महिलाओं की जांच पुरुष डॉक्टरों द्वारा ही की जाती है. प्रसव के समय स्थिति नाजुक होने पर एएनएम पुरुष डॉक्टर से ही परामर्श लेती हैं. प्रसव के समय जच्चा व बच्चा का भविष्य राम भरोसे रहता है, जिसका जीता-जागता उदाहरण रामपुर का यह 30 बेड का अस्पताल दे रहा है. क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रतिनियुक्त प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश कुमार ने बताया कि चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को जो परेशानी हो रही है, उसका हमें खेद है. फिर भी हमने यहां से किसी मरीज को बिना इलाज किये बगैर नहीं लौटने दिया है. इन दिनों मौसम की बेरुखी की वजह से सीजनल बीमारी, डिहाइड्रेशन व लूज मोशन के प्रतिदिन 100 से 150 मरीज इलाज कराने आ रहे हैं. भविष्य में चिकित्सकों की मांग की गयी है, ताकि व्यवस्था में सुधार लाया जा सके. नयी नियुक्तियां होने पर स्थिति बेहतर हो जायेगी.
रामपुर सीएचसी खुद ''अस्वस्थ'', मात्र एक डॉक्टर के भरोसे दो लाख की आबादी
दंत चिकित्सा व एक्सरे की सुविधा है, पर डॉक्टर न होने से मरीज रेफर होने को मजबूर
