Bhabua News: बिहार सरकार द्वारा राज्य में शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष पहल शुरू की गई है. चाइल्ड हेल्थ से जुड़ी स्वास्थ्य योजनाओं और पोषण सेवाओं को जमीनी स्तर पर सटीक बनाने के लिए अब आंकड़ों के सत्यापन (Data Validation) पर विशेष जोर दिया जा रहा है. राज्य स्वास्थ्य समिति के शिशु स्वास्थ्य कोषांग द्वारा शुरू की गई इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिले.
शिशु देखभाल और पोषण व्यवस्था होगी सुदृढ़
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, शिशु रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं:
- बीमारियों पर नियंत्रण: डायरिया जैसे रोगों के इलाज के लिए समय पर ओआरएस (ORS) और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी.
- गृह भ्रमण व्यवस्था: नवजात शिशुओं की देखरेख के लिए जन्म के बाद स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा किए जाने वाले गृह भ्रमण (Home Visit) को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा.
- स्तनपान व कुपोषण पर जोर: नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व को बढ़ावा देने के साथ-साथ पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार, दाखिले और फॉलो-अप की प्रक्रिया को पूरी तरह व्यवस्थित किया जाएगा.
आंकड़ों की सटीकता से बनेंगी बेहतर योजनाएं
चाइल्ड हेल्थ से जुड़े हर इंडिकेटर के डेटा को प्रमाणित और सटीक रखने का प्रयास किया जा रहा है. इससे भविष्य में बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल के लिए अधिक प्रभावी और सटीक नीतियां बनाने में मदद मिलेगी.
यूनिसेफ के सहयोग से सघन मॉनिटरिंग
राज्य स्वास्थ्य समिति के मार्गदर्शन में कैमूर जिले में भी इस अभियान को सक्रिय कर दिया गया है. सिविल सर्जन (CS) डॉ. चंदेश्वरी रजक ने बताया कि विभाग का मुख्य लक्ष्य शिशु स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों को पूरी तरह प्रामाणिक और पारदर्शी बनाना है. इस तकनीकी प्रक्रिया और सघन मॉनिटरिंग में यूनिसेफ (UNICEF) का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर बच्चों की सेहत में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा.
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