धान खरीद को लेकर किसान व प्रशासन आमने-सामने, खलिहान में पड़ा धान बना परेशानी

जिले में सरकारी धान खरीद व्यवस्था को लेकर किसान व प्रशासन आमने-सामने आ गये हैं. कुंज, सिलड़ी सहित कई गांवों के किसानों का आरोप है कि उनका धान अब तक खलिहान में ही पड़ा हुआ है

कागजों में खरीद, खलिहान से नहीं उठ रहा धान मौसम बना चिंता का कारण, धान खराब होने का डर भभुआ शहर. जिले में सरकारी धान खरीद व्यवस्था को लेकर किसान व प्रशासन आमने-सामने आ गये हैं. कुंज, सिलड़ी सहित कई गांवों के किसानों का आरोप है कि उनका धान अब तक खलिहान में ही पड़ा हुआ है, लेकिन सहकारी समितियों द्वारा उठाव नहीं किया जा रहा है. किसानों का कहना है कि धान खरीद की प्रक्रिया जमीनी स्तर पर ठप पड़ी है व खरीद केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गयी है. किसानों द्वारा प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी बीसीओ को दिये गये लिखित आवेदनों में आरोप लगाया गया है कि धान बिक्री के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद न तो खरीद की तिथि बतायी जा रही है और न ही समिति की ओर से कोई ठोस पहल की जा रही है. खुले में पड़े धान के खराब होने की आशंका से किसान खासे परेशान हैं. किसानों का कहना है कि खुले में पड़ा धान मौसम की मार झेल रहा है. कोहरा व नमी बढ़ने से धान के खराब होने का खतरा बना हुआ है. छोटे व सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि उनकी पूरी आमदनी इसी फसल पर निर्भर करती है. वहीं, यदि बारिश हो गयी तो कई किसानों का धान खलिहान में ही पड़े रह जायेगा, जिसे लेकर किसान काफी चिंतित हैं. किसान बनाम प्रशासन, अब निगाहें समाधान पर एक ओर किसान धान खराब होने की आशंका से चिंतित हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन व्यवस्था सुचारू होने का दावा कर रहा है. दोनों पक्षों के बयानों के बाद अब सवाल यह उठता है कि जमीनी हकीकत क्या है और वास्तविक किसानों का धान कब तक उठाया जायेगा. किसानों की मांग है कि धान खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता लायी जाये व जिन किसानों ने आवेदन दिया है, उनके धान का शीघ्र उठाव कराया जाये. किसानों का आरोप, कागजों में हो रही खरीद –कुंज गांव के किसान संजय सिंह का कहना है कि उन्होंने समय पर धान की कटाई कर उसे सुखाकर बिक्री के लिए तैयार कर लिया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समिति द्वारा उठाव नहीं किया गया. कई बार समिति व अधिकारियों से संपर्क किया गया, अंत में मजबूर होकर बीसीओ को लिखित आवेदन दिया गया. इसके बावजूद आज तक धान खलिहान में ही पड़ा है. उनका आरोप है कि कुछ लोगों का धान कागजों में दो-दो बार खरीदा दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक किसानों को नजरअंदाज किया जा रहा है. — सिलड़ी गांव के किसान मिथलेश तिवारी ने भी धान खरीद में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि उनका धान पिछले एक महीने से पूरी तरह तैयार अवस्था में रखा हुआ है. कई बार समिति अध्यक्ष व सचिव से आग्रह किया गया, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला. ऐसा प्रतीत होता है कि खरीदारी केवल फाइलों में हो रही है. समय रहते धान का उठाव नहीं हुआ तो भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए वास्तविक किसानों को न्याय दिलाने की मांग की. कहते हैं बीसीओ, आरोप पूरी तरह बेबुनियाद इस संबंध में पूछे जाने पर प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी सूर्यकांत कुमार ने किसानों के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि धान खरीद व उठाव की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार चल रही है. हड़ताल के कारण कुछ समय के लिए व्यवस्था प्रभावित हुई थी, लेकिन अब उठाव की गति बढ़ा दी गयी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन किसानों द्वारा आवेदन देने की बात कही जा रही है, वे न तो उनसे संपर्क कर रहे हैं और न ही संबंधित पैक्स अध्यक्ष से समन्वय बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे स्वयं व पैक्स अध्यक्ष मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसान संपर्क किये बिना ही चले गये. ऐसे में बिना समन्वय के धान उठाव संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि धान खरीद में किसी तरह की दोहरी नीति नहीं अपनायी जा रही है. जो किसान नियमानुसार संपर्क करेंगे, उनका धान अवश्य उठाया जायेगा. लगाये जा रहे आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं.

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Author: VIKASH KUMAR

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