मुल्क में अमन-चैन व तरक्की के लिए इबादत में उठे नन्हे हाथ. भभुआ सदर. हर साल की तरह इस बार भी शहर में माह-ए-रमजान के महीने में बड़ों के साथ-साथ छोटे मासूम बच्चे भी रोजा रखने में पीछे नहीं हट रहे हैं. नन्हे रोजेदार भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं. बड़ों के साथ बच्चे भी रोजा रखने के साथ पांचों वक्त की नमाज व कुरान-ए-पाक की तिलावत कर रहे हैं. शहर के कई ऐसे बच्चे हैं जो हर दिन रोजा रख नियम का पालन कर रहे हैं. शहर के वार्ड एक के निवासी दीवान अमजद खान की पत्नी गुलाफ्शां परवीन खान सहित उनकी बेटियां 16 वर्षीय एकरा खान, 14 वर्षीय मुस्कान खान, 9 वर्षीय अलीशा खान व सात वर्षीय जरीन खान रमजान के पहले दिन से रोजा रखते आ रहे हैं. अमजद खान कहते हैं कि रहमत व बरकत का यह महीना घर के लोगों में इबादत के लिए जुनून पैदा करता है. उनके बच्चों द्वारा पहले दिन से ही रोजा रखा जा रहा है व तिलावत की जा रही है. रोजा रखने के संबंध में मुफ्ती मौलाना नौशाद खान ने बताया कि 15 साल या उससे ऊपर के बच्चों पर रोजा फर्ज है. यदि कम उम्र के बच्चे रोजा रखते हैं, तो उन्हें अल्लाह की नजदीकी जल्द मिलती है व इसका सवाब उनके माता-पिता को भी मिलता है. इधर, नन्हे रोजेदारों ने कहा कि हम रोजा रखकर अल्लाह पाक की इबादत कर रहे हैं व अपने परिवार के साथ-साथ मुल्क की तरक्की व अमन की दुआ मांग रहे हैं.
नन्हें रोजेदार भी अकीदत के साथ रख रहे हैं रोजे
हर साल की तरह इस बार भी शहर में माह-ए-रमजान के महीने में बड़ों के साथ-साथ छोटे मासूम बच्चे भी रोजा रखने में पीछे नहीं हट रहे हैं.
