सदर अस्पताल अलर्ट मोड पर, लू के मरीजों के लिए की गयी विशेष व्यवस्था. कूलर, आइस पैक व दवाओं के साथ तैनात रहेंगे चिकित्सक, जरूरत पड़ने पर बढ़ाये जायेंगे बेड. भभुआ सदर. जिले में पिछले 10 दिनों से जबर्दस्त धूप व लू का प्रकोप जारी है. मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए सरकार के निर्देश पर सदर अस्पताल अलर्ट मोड में है. पिछले सोमवार से ही यहां हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए कूलर, आइस पैक, दवा व स्लाइन के साथ 11 बेड का वातानुकूलित ट्रीटमेंट वार्ड शुरू कर दिया गया है. इस वार्ड में लू की चपेट में आने वाले मरीजों के लिए मुफ्त में सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जायेंगी. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ विनोद कुमार ने बताया कि गर्मी भीषण पड़ने लगी है, इसलिए सभी को सतर्क रहना होगा. उन्होंने कहा कि हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए फिलहाल 11 बेड का वार्ड बनाया गया है, किंतु यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है, तो इसे 20 बेड का कर दिया जायेगा. वार्ड में कूलर, आईस पैक, पंखे व दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था कर दी गयी है. इसके अतिरिक्त अस्पताल के इमरजेंसी भर्ती वार्ड में भी कूलर लगा दिये गये हैं. डॉ विनोद कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि हीट वेव की आपात स्थिति से निबटने के लिए सदर अस्पताल पूरी तरह तैयार है. सरकार के निर्देशानुसार बनाये गये इस विशेष वार्ड में पीड़ितों के लिए आईस पैक व दवाओं की स्पेशल किट उपलब्ध रहेगी. चिकित्सक किसी भी स्थिति का सामना करने के लिये 24 घंटे तैनात रहेंगे, ताकि समय रहते उचित उपचार की सुविधा मिल सके. =लू लगने के लक्षण कमजोरी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, शरीर से अधिक पसीना आना, मिचली, उल्टी, सांस और दिल की धड़कन तेज होना, नींद पूरी न होना। =हीट वेव में सतर्कता बहुत जरूरी शरीर में पानी की कमी न हो, बाहर निकलने पर सिर को ढकें, धूप से आने के बाद तुरंत ठंडा पानी न पीएं, नींबू, छाछ व आम के पने का सेवन करते रहें, मौसमी फल, सब्जी का सेवन करें. =हीट स्ट्रोक की चपेट में आने के लक्षण कमजोरी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, शरीर से अधिक पसीना आना, मिचली, उल्टी, सांस और दिल की धड़कन तेज होना, नींद पूरी न होना. इनसेट धूप लगने पर मल्टी आर्गन फेल्योर होने का रहता है खतरा भभुआ सदर. अप्रैल महीने में जिस प्रकार से गर्मी और धूप पड़ रही है उससे शरीर में मल्टी ऑर्गन के फेल होने का खतरा रहता है. सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ विनोद कुमार का कहना है कि शरीर में गर्मी को नियंत्रित करने के लिए हाईपोथेलेमस (एक प्रकार की ग्रंथि जो तापमान को नियंत्रित करती है) होता है. सीधे शरीर पर धूप पड़ने के बाद हाइपोथेलेमस का स्तर बढ़ता है. इस अवस्था में शरीर की कोशिकाएं सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाती हैं. इससे मल्टी आर्गन फेल्योर का खतरा रहता है और सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, बेहोशी आती है. बचाव के लिए सबसे अधिक जरूरी है कि सिर से लेकर पूरे शरीर को ढककर रखना चाहिए. पानी की मात्रा कम न होने दें. बाहर निकलने पर साथ में नीबू पानी और इलेक्ट्रॉल पावडर साथ रखे. अगर किसी वजह से धूप लग भी गयी है तो अपने को ठंडे कमरे में रखे. वहां कमरे में सूखापन न रहे. इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए.
गर्मी बढ़ते ही ''हीट वेव'' से निबटने के लिए 11 बेडों का विशेष वार्ड शुरू
सदर अस्पताल अलर्ट मोड पर, लू के मरीजों के लिए की गयी विशेष व्यवस्था.
