प्रशासनिक अधिकारियों व एजेंसी संचालक की गलती का खामियाजा भुगत रहे शहरवासी # 09 जून 2012 में जमीन रजिस्ट्री कराने वालों को नोटिस कर वसूला गया था शहरी भूमि का रेट # 20 दिसंबर 2004 को मोहनिया में मां दुर्गे इंडेन गैस एजेंसी का हुआ था शुभारंभ # अब गैस एजेंसी के वितरक कार्यालय को शहरी क्षेत्र घोषित कराने के लिए प्रशासन ने किया पत्राचार # कब तक नगरवासियों को गैस बुकिंग के लिए करना होगा 45 दिन का इंतजार? शहरी टैक्स भरने के बावजूद उपभोक्ताओं को 45 दिन बाद मिल रही गैस बुकिंग की सुविधा # प्रभात खास # मोहनिया सदर. जब पश्चिम एशिया में ईरान के साथ इजराइल व अमेरिका का संयुक्त युद्ध शुरु हुआ व एलपीजी गैस का आयात प्रभावित हुआ और देश में एलपीजी गैस की किल्लत शुरु हुई, तभी प्रशासन को नगर पंचायत में अवस्थित मां दुर्गे इंडेन गैस एजेंसी के वितरक कार्यालय को ग्रामीण क्षेत्र से स्थानांतरित कर शहरी क्षेत्र घोषित कराने के लिए पत्राचार करने की याद आयी. जबकि, मोहनिया को 09 जून 2012 को ही नगर पंचायत घोषित कर दिया गया था. उक्त गैस एजेंसी का वितरक कार्यालय भले ही नगर पंचायत में अवस्थित है, लेकिन कागजों में अभी भी वह रुरल (ग्रामीण क्षेत्र) में ही अवस्थित माना जा रहा है. इसका नतीजा है कि इसका खामियाजा नगर पंचायत में रहने वाली बड़ी आबादी के लोग भुगत रहे हैं. उनको गैस डिलीवरी के 45 दिन बाद ही गैस बुकिंग की सुविधा व डीएसी नंबर प्राप्त हो रहा है. गैस एजेंसी के वितरक कार्यालय को शहरी क्षेत्र घोषित कराने के लिए यदि प्रशासन व गैस एजेंसी संचालक द्वारा पहले ही ठोस पहल किया गया होता, तो आज नगर पंचायत के गैस कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्र का लाभ मिलता और 25 दिन में गैस बुकिंग होती व गैस सिलिंडर आसानी से मिल जाता. 20 दिसंबर 2004 को मां दुर्गे इंडेन गैस एजेंसी के वितरक कार्यालय का मोहनिया में शुभारंभ हुआ. उस समय मोहनिया ग्राम पंचायत थी और इसकी कटेगरी रुरल थी. इसके आधार पर गैस एजेंसी का संचालन शुरु हुआ. समय बीतता गया और 09 जून 2012 को मोहनिया के सभी 16 वार्ड को नगर पंचायत घोषित कर दिया गया. मोहनिया को नगर पंचायत का दर्जा मिल गया, लेकिन इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड की फाइलों में आज भी उक्त गैस एजेंसी रुरल एरिया में ही संचालित है. इसका परिणाम है कि नगर पंचायत के गैस उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्र का लाभ नहीं मिल रहा है. ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को गैस डिलीवरी के 45 दिन पर व शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 25 दिन पूरे होने पर गैस बुकिंग की सुविधा दी गयी है. ऐसा प्रशासन का कहना है, लेकिन नगर पंचायत के उपभोक्ताओं को डीएसी नंबर मिलने के 50-55 दिन बाद ही गैस सिलिंडर मिल पा रहा है. जबकि, नगरवासियों को सभी तरह के शहरी टैक्स का भुगतान करना होता है. एजेंसी संचालक के अनुसार गैस एजेंसी की कोटि रुरल से अर्बन करना काफी मुश्किल है, हालांकि इसकी जानकारी अधिकारियों को दी जा चुकी है. इस एजेंसी के उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 28,000 बतायी जाती है. जब सरकार राजस्व के मामले में कोई समझौता नहीं कर सकती है, तो नगर पंचायत के लोग गैस सिलिंडर के मामले में आखिर किस आधार पर समझौता कर लें? अब तक गैस एजेंसी के वितरक कार्यालय को शहरी क्षेत्र घोषित क्यों नहीं किया गया, यह बड़ा सवाल है. गैस एजेंसी व प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा नगर की आम जनता क्यों भुगतेगी? # क्या कहते हैं नगरवासी – नगर पंचायत के प्रथम व पूर्व चेयरमैन अज्ञेय बिक्रम बोस्की ने कहा कि प्रशासन द्वारा गैस एजेंसी कार्यालय को शहरी क्षेत्र घोषित कराने के लिए जो पत्राचार अब किया गया है. यदि एलपीजी गैस की किल्लत शुरु होने से पहले एजेंसी संचालक व प्रशासन ने यह कदम उठाया होता, तो शहर के लोगों को आज 45 दिन बाद गैस सिलिंडर की बुकिंग नहीं करना पड़ता. – नगर पंचायत के वार्ड सात के रहने वाले वंशीधर राम ने कहा कि गैस एजेंसी के वितरक कार्यालय को रुरल से अर्बन एरिया में कराने के लिए प्रशासन द्वारा जो कदम अब उठाया गया है, वह 14 वर्ष पहले ही किया गया होता तो आज नगरवासियों को 25 दिन बाद गैस सिलिंडर आसानी से मिल जाता. – नगर पंचायत के रहने वाले नंदजी सिंह ने कहा कि जबकि नगर वासियों से वर्ष 2012 से ही नगर पंचायत सभी तरह का टैक्स वसूल रहा है, गलती एजेंसी संचालक और प्रशासनिक अधिकारियों की और खामियाजा आम जनमानस भुगत रहे हैं. – नगर के स्टुवरगंज की रहने वाली अंजू कुमारी कहती है कि कभी सोचा भी नही था कि लकड़ी, कोयला पर खाना बनाना पड़ेगा. गैस की समस्या आयी तो पता चला शहरी क्षेत्र में 25 दिन बाद गैस सिलिंडर मिल जायेगा. किसी तरह 25 दिन गैस चलाया जायेगा लेकिन यहां तो 45 दिन बाद बुकिंग हो रहा है. कहने के लिए नगर पंचायत है लेकिन गैस सुविधा गांव वाली मिल रही है # बोले गैस एजेंसी संचालक इस संबंध में पूछे जाने पर मां दुर्गे इंडेन गैस एजेंसी के संचालक प्रदीप कुमार पटेल ने कहा कि जब गैस एजेंसी लेने के लिए आवेदन किया गया था उस समय कोटि में रुरल एरिया लिखा गया था, हमने मोहनिया को नगर पंचायत घोषित होने के बाद कंपनी को लिखा भी है, लेकिन कोटि में बदलाव करना शायद संभव नहीं है. यदि उपभोक्ता इ-केवाइसी कराते समय अपना पता शहर का दर्ज कराये तो शायद शहरी क्षेत्र का लाभ उनको मिल सकता है.
गैस संकट गहराया, तो 14 वर्ष बाद गैस एजेंसी को रुरल से अर्बन कराने की आयी याद
प्रशासनिक अधिकारियों व एजेंसी संचालक की गलती का खामियाजा भुगत रहे शहरवासी
