20 फीसदी वाहनों में ही लग पायी हाइ सिक्यूरिटी नंबर प्लेट

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का नहीं हुआ पालन, पुराने वाहनों के लिए 15 जुलाई 2012 थी अंतिम तिथि भभुआ/मोहनिया सदर. कैमूर को 1990 में जिला का दर्जा मिला था और 1991 से सभी कामकाज शुरू हो गये. इस 25 वर्ष की अवधि में लाखों छोटे-बड़े वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. जिले की सड़कों पर लाखों […]

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का नहीं हुआ पालन, पुराने वाहनों के लिए 15 जुलाई 2012 थी अंतिम तिथि
भभुआ/मोहनिया सदर. कैमूर को 1990 में जिला का दर्जा मिला था और 1991 से सभी कामकाज शुरू हो गये. इस 25 वर्ष की अवधि में लाखों छोटे-बड़े वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. जिले की सड़कों पर लाखों की संख्या में दौड़ रहे छोटे-बड़े वाहनों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के पांच वर्ष बाद भी परिवहन विभाग हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट नहीं लगवा सका है़ वर्ष 2012 में राज्य के परिवहन सूचना एवं जन सम्पर्क मंत्री वृशिण पटेल ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर देश के सभी राज्यों में चलनेवाले छोटे-बड़े सभी प्रकार के वाहनों में हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट लगाया जायेगा.
कब से लगानी थी प्लेट और क्या हैं फायदे
बिहार में चलनेवाले सभी नये वाहनों में 31 मार्च 2012 से हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट लगाने का आदेश सभी जिले के परिवहन विभाग को दिया गया था. पुराने वाहनों में इस प्लेट को 15 जुलाई 2012 तक लगाना था. यहां स्थिति यह है कि पांच साल बाद भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को शत-प्रतिशत लागू करने में विभाग फिसड्डी साबित हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश की सड़कों पर चलनेवाली सभी गाड़ियों में हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट लगाने का आदेश जारी करने का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगाना था. इसके लग जाने से इस नंबर प्लेट को बदला नहीं जा सकेगा.

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