मोहनिया (सदर) : लंबे समय से ब्लड कैंसर व बोन टीबी की बीमारी से जूझ रहे प्रखंड के पानापुर पंचायत के सोंधी गांव निवासी 35 वर्षीय छोटू राम की मौत हो गयी. उनकी 80 वर्षीय विधवा मां व तीन बेटियों ने जब अरथी को कंधे उठाया, तो पूरा गांव शोक मेें डूब गया. सबकी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली.
मृतक अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था. बचपन में ही पिता श्यामलाल की मृत्यु हो गयी थी. विधवा मां ने लालन-पालन कर अपने पुत्र की शादी भी समय पर की. शादी के कुछ दिनों के बाद उसे ब्लड कैंसर व बोन टीबी हो गया.
इलाज कराने में असमर्थ होने के कारण ग्रामीणों ने चंदा लगा कर बनारस से लेकर दिल्ली तक इलाज कराया. इसी बीच किस्मत ने एक और बड़ा धोखा दिया, जब 2002 में छोटू राम की पत्नी ने भी मौत हो गयी. इधर, तीन बेटियां भी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी.
बीमारी पिता, बूढ़ी दादी व गरीबी को देख उनकी भी आत्मा कांपने लगी. लेकिन, जब बुधवार की सुबह पिता ने दम तोड़ा, तो बूढ़ी मां व बेटियों पर तो गम का पहाड़ ही टूट पड़ा. ग्रामीणों ने चंदा लगा कर अंतिम संस्कार किया व बेटियों की शादी का जिम्मा उठाया.
ब्लड कैंसर व बोन टीबी से लंबे समय से जूझ रहे छोटू की मदद किसी जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी ने नहीं की. लेकिन, ऊपर वाले की कृपा से गांव के लोगों ने इस पीड़ित गरीब के इलाज में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा. अमेठ पंचायत के मुखिया वंश नारायण राम भी खबर सुन मदद के लिए मृतक के गांव पहुंचे. उन्होंने बताया कि मृतक को टेकारी कला गांव में सिलिंग की सवा बीघा जमीन मिली थी. उसमें मसूर बोया गया था. मौत की खबर सुनते ही मानवता को शर्मसार करते हुए भरखर गांव के मोती लाल गुप्ता ने उस गरीब की फसल भी काट ली.
