बालू की भारी किल्लत है. इसकी वजह से सरकारी व निजी निर्माण कार्य लगभग बंद हो गये हैं. इसका मजदूरों पर भी असर पड़ रहा है.
भभुआ (नगर) : बाहुबलियों पर पैसे की बारिश करनेवाला सोन नदी का सोना यानी बालू अभी आम व खास लोगों के लिए सचमुच ‘सोना’ बन गया है. पूरे राज्य में बालू की भारी किल्लत है और इस वजह से सरकारी व निजी निर्माण कार्य लगभग बंद हो गये हैं. इसका साइड इफैक्ट सूबे में कृषि के बाद सबसे ज्यादा असंगठित रोजगार पर पड़ा है.
बाजार में बालू की नया खेप नहीं आने से मौजूदा भंडारण अब खत्म होने के कगार पर है. जिन कारोबारियों के पास पहले का कुछ स्टॉक बचा हुआ है, वह इसकी मुंह मांगी कीमत वसूल रहे हैं.
बालू कुछ दिनों पूर्व 1600 रुपये ट्रैक्टर बिक रहा था. वह अब चार साढ़े चार हजार रुपये में भी मुश्किल से मिल रहा है. मकान, दुकान, सड़क व पुल आदि का निर्माण बंद होने की वजह से बड़ी संख्या में मजदूर भुखमरी के कगार पर आ गये हैं. सबसे बड़ी समस्या है कि निर्माण पर इतना बड़ा संकट होने के बावजूद जल्द कानूनी हल निकालने को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखायी जा रही है.
लटक गये छोटे-बड़े प्रोजेक्ट : राज्य के सभी बालू घाटों के खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी है. इसके बाद कोइलवर समेत सोन व अन्य नदियों के बालू की निकासी पर रोक लग गयी है. कहीं चोरी-छुपे बालू मिल भी रहा है, तो दोगुने से ज्यादा कीमत में. लिहाजा महंगाई के चलते ठेकेदारों ने काम कराने से हाथ खड़ कर दिये हैं. इससे छोटे-बड़े सभी प्रोजेक्टर लटक गये हैं.
पाबंदी के साथ चढ़ा भाव : बालू के खनन व ढुलाई पर रोक लगते ही इसका भाव आसमान छूने लगा है. बिल्डिंग मेटेरियल का कारोबार करनेवाले अशोक पटेल ने बताया कि खनन पर रोक से पहले बालू का भाव 15 से 16 सौ रुपये प्रति ट्रॉली था.
लेकिन, खनन पर रोक लगने के बाद कीमत बढ़ कर चार साढ़े चार हजार पहुंच गया है. ज्यादा कीमत होने से लोगों ने निर्माण कार्य भी बंद कर दिया है. बालू पर रोक से छड़ सीमेंट व गिट्टी के अलावा संबंधित अन्य सामान की बिक्री प्रभावित हुई है. बालू एक ऐसी सामग्री है, जिसके बगैर निर्माण कार्य संभव नहीं है. बालू निकासी बंद होने से व्यवसाय पर भी असर पड़ा है.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के कोलकाता पीठ ने लगायी रोक : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की कोलकाता पीठ ने हाल ही में अमन कुमार सिंह बनाम बिहार सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार में बालू खनन व ढुलाई पर रोक लगा दी है. याचिका के अनुसार, बालू खनन के मामले में बिहार में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट-2010 की धारा 14 का उल्लंघन किया जा रहा है. इस पर 19 जनवरी को सुनवाई हुई व ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए बालू खनन व उसकी ढुलाई पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दे दिया.
अगली सुनवाई 19 फरवरी को हुई, लेकिन बिहार सरकार को राहत नहीं मिली. अब बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है. हालांकि, ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट के नियमों की अनदेखी अब तक क्यों हुई और बगैर अनुमति के बालू खनन का कारोबार कैसे चलता रहा, इस पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है.
