किसानों की पीड़ा देखनी है, तो कोनहरा व अवंती आइये

किसानों की पीड़ा देखनी है, तो कोनहरा व अवंती आइयेनहरे सूखीं, अब डीजल पंप का सहारा10 हजार एकड़ खेतों को सिंचित करतीं हैं दो नहरेवर्ष 2015 में भी 15 जनवरी के बाद आया था दोनों नहरो में पानी, तब भी किसानों को हुआ था नुकसानप्रतिनिधि, नुआंव (कैमूर) प्रखंड क्षेत्र की दो बड़ी नहरें गारा चौबे […]

किसानों की पीड़ा देखनी है, तो कोनहरा व अवंती आइयेनहरे सूखीं, अब डीजल पंप का सहारा10 हजार एकड़ खेतों को सिंचित करतीं हैं दो नहरेवर्ष 2015 में भी 15 जनवरी के बाद आया था दोनों नहरो में पानी, तब भी किसानों को हुआ था नुकसानप्रतिनिधि, नुआंव (कैमूर) प्रखंड क्षेत्र की दो बड़ी नहरें गारा चौबे व करगहर नहर में पानी नहीं आने से क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से बेहाल हैं. वहीं पैक्स व एसएफसी के चक्कर में मेहनत से उपजाये गये धान पहले से ही खलिहान में पड़े हैं. धान की कटाई के बाद खेतों में गेहूं की बुआई के लिए किसान प्रति एकड़ दो हजार रुपये की लागत से डीजल पंप से पटवन करा रहे हैं. वहीं, एक बार फिर गेहूं के बिचड़े को जिंदा रखने के लिए फिर से पानी की आवश्यकता है. ऐसे में किसान जनप्रतिनिधि व प्रशासन की तरफ टकटकी लगाये बैठे हैं कि किसी की तो नजरें इनायत हों और किसानों का बेड़ा पार हो. अवंती के किसान सर्वानंद सिंह ने बताया कि किसानों की पीड़ा देखनी है, तो कोनहरा व अवंती गांव के बधार में आकर देखिये. यहां पानी के अभाव में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल सूख रही है. नुआंव के किसान ललन पांडे, उदय शंकर जायसवाल व सिंहासन सिंह ने बताया कि प्रखंड मुख्यालय के इस गांव में एक भी सरकारी ट्यूबेल नहीं है. वर्ष 2015 में भी जनवरी के अंतिम सप्ताह में गारा चौबे नहर में पानी आया था, तब भी किसानों के लाखों रुपये डीजल पंप से पटवन की भेंट चढ़े थे. एक बार फिर पानी नहीं मिलने से खेती की स्थिति काफी भयावह हो गयी है. किसानों ने जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैया से नाखुश होकर कहा कि लोकसभा व विधानसभा के चुनाव में तो हर नेता ने किसानों से बड़े-बड़े वादे किये थे, पर आज किसानों की इस समस्या के प्रति कोई भी संवेदनशील नहीं है. किसानों ने प्रशासनिक पदाधिकारियों से अविलंब नहर में पानी देने की मांग की है.फ़ोटो:-2.गारा चौबे की सुखी नहर380 रुपये में बिक रही यूरिया खादनुआंव (कैमूर). नुआंव बाजार में खाद की कालाबाजारी जारी है. खेतों में प्रयोग की जाने वाली यूरिया खाद 380 रुपये की दर से बाजार में धड़ल्ले से बेची जा रही है और विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बन देख रहे हैं. यह आरोप है उन किसानों का है जिन्होंने पिछले एक सप्ताह से बाजार का चक्कर लगा रहे हैं. अवंती के किसान झेंगठ सिंह, पिंटू सिंह, लक्ष्मण प्रसाद व श्रीकांत उपाध्याय ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से बाजार में खाद के लिए आ रहे हैं. दुकानदार अधिक मूल्य पर खाद बेच रहे हैं. इसकी सुधी लेने वाला कोई नहीं. किसानों ने कहा कि उन्होंने जब इस बाबत प्रखंड कृषि पदाधिकारी को जानकारी दी, तो उक्त दुकानदार को पकड़वाने की बात कहने लगे. ऐसे में किसान खेती करें या चौकीदारी समझ से परे है. फिलहाल किसानों के खेत खाद के अभाव में खराब हो रहे हैं. किसानों ने खाद की कालाबाजारी पर रोकथाम के लिए प्रशासन से गुहार लगायी है.आज धरना देगें नियोजित शिक्षक धरना को सफल बनाने को लेकर किया जनसंपर्क रामगढ़ (कैमूर). शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज समाहरणालय पर धरना देंगे. इसको लेकर शिक्षक संघ के लोगों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. शुक्रवार को संघ के प्रखंड अध्यक्ष विनय कुमार के नेतृत्व में शिक्षको ने जनसंपर्क किया. इस दौरान शिक्षको ने कहा कि नौ जनवरी को एकजुटता के साथ समाहरणालय पर धरना देंगे. सरकार ने वेतनमान के नाम पर छलावा किया हैं.धरना के दौरान मुद्दा स्नातक ग्रेड पे लागू करना, ससमय वेतन का भुगतान करने, अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने, पूर्वरूपेण शिक्षकों को 93 सौ का वेतनमान लागू करने सेवा पुस्तिका का संधारण करना आदि मागें शामिल हैं.

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