jehanabad News : जहानाबाद में रविवार से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने निराश हो चुके किसानों के चेहरे पर फिर से खुशी ला दी है. बारिश के बाद किसान परती पड़े खेतों में धान की रोपनी में जुट गये हैं. पिछले दो दिनों में रोपनी के काम में तेजी आने के बाद जिले के करीब 98 फीसदी खेतों में धान की रोपनी पूरी हो गयी है. अब केवल दो फीसदी खेतों में रोपनी बाकी है. किसानों को उम्मीद है कि अगले दो-तीन दिनों तक अच्छी बारिश हुई तो जिले में धान की रोपनी का आंकड़ा 100 फीसदी तक पहुंच जाएगा.
सामान्य से 60 फीसदी कम हुई बारिश
इस साल जिले में सामान्य से करीब 60 फीसदी कम बारिश हुई है. बारिश की कमी के कारण धान की रोपनी प्रभावित हुई. सावन के करीब 20 दिन बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में खेतों में रोपनी नहीं हो सकी थी. करीब दस दिन पहले हुई बारिश के बाद रोपनी में तेजी आयी थी, लेकिन इसके बाद लगातार बारिश नहीं होने से कई खेत परती रह गये थे.
बारिश से किसानों में लौटा उत्साह
पिछले दस दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों और आसपास के आहर-पोखर में पानी लगभग सूख गया था. किसान धान की रोपनी को लेकर निराश होने लगे थे. रविवार से शुरू हुई बारिश ने किसानों को फिर से उम्मीद दी. बारिश होते ही किसान शेष बचे खेतों में रोपनी के लिए जुट गये. कई किसान बारिश के पानी के साथ मोटर पंप चलाकर भी खेतों में पानी भर रहे हैं.
अगले दो-तीन दिन बारिश हुई तो 100 फीसदी रोपनी की उम्मीद
मौसम विभाग ने जिले में अगले दो दिनों तक बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान जताया है. इससे किसानों को उम्मीद है कि शेष खेतों में भी धान की रोपनी पूरी हो जाएगी. हालांकि, यदि बारिश का सिलसिला थम गया तो किसानों के सामने फिर सिंचाई का संकट खड़ा हो सकता है.
भूजल स्तर नीचे जाने से मोटर पंप भी दे रहे जवाब
बारिश की कमी के साथ जिले के कई इलाकों में भूजल स्तर भी काफी नीचे चला गया है. बताया जा रहा है कि कई क्षेत्रों में जलस्तर 80 से 90 फीट तक नीचे पहुंच गया है. ऐसे में 80 फीट की गहराई पर लगे समरसेबल मोटर से भी पानी नहीं निकल रहा है. किसानों को मोटर में अतिरिक्त पाइप लगाकर पानी निकालना पड़ रहा है.
नदी और उसके आसपास के इलाकों में मोटर पंप से सिंचाई हो रही है, लेकिन सुदूर क्षेत्रों में मोटर पंप भी जवाब देने लगे हैं. इससे धान की रोपनी के साथ फसल बचाने के लिए भी किसान बारिश पर निर्भर हो गये हैं.
पेयजल संकट पर भी बारिश से राहत की उम्मीद
भूजल स्तर गिरने का असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है. शहरी और ग्रामीण इलाकों में कई चापाकल जवाब दे चुके हैं, जबकि कुछ जगहों पर समरसेबल मोटर भी पानी नहीं दे रहे हैं. ऐसे में लोगों को भी बारिश से राहत की उम्मीद है. किसानों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अगले तीन-चार दिनों तक अच्छी बारिश होती है तो भूजल स्तर में सुधार हो सकता है और सिंचाई के साथ पेयजल संकट भी कम होगा.
