अरवल में डॉक्टरों की हड़ताल से ठप रही ओपीडी सेवा, इलाज के बिना लौटे सैकड़ों मरीज

17 जुलाई को सदर अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत के बाद हंगामा हुआ, जिसमें सिविल सर्जन से मारपीट की गई. इसी के विरोध में मंगलवार को जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा सांकेतिक रूप से बंद रही, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं.

Arwal OPD closure: 17 जुलाई को सदर अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान एक महिला की मौत के बाद हुए हंगामे और सिविल सर्जन के साथ मारपीट के विरोध में मंगलवार को जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा सांकेतिक रूप से बंद रही. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल के कारण मरीजों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.

सिविल सर्जन से मारपीट के विरोध में बंद रही ओपीडी

17 जुलाई को सदर अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान रागिनी कुमारी की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा किया था. इस दौरान सिविल सर्जन के साथ मारपीट की घटना भी हुई थी. घटना के बाद सिविल सर्जन ने सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए दोषियों पर कार्रवाई और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा की मांग की थी. चिकित्सकों का आरोप है कि पांच दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई.

मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा

ओपीडी सेवा बंद रहने के कारण सदर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ा. करपी प्रखंड के शिवनगर निवासी रंजू देवी ने बताया कि वह अल्ट्रासाउंड कराने आई थीं, लेकिन ओपीडी बंद होने के कारण वापस लौटना पड़ा. वहीं सहार खैरा गांव के रंजीत कुमार पैर में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण इलाज नहीं हो सका.

प्रतिदिन 600 से 700 मरीज आते हैं ओपीडी में

सदर अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 600 से 700 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं. लेकिन हड़ताल के कारण सभी मरीज प्रभावित हुए. हालांकि इमरजेंसी सेवा चालू रही और दोपहर दो बजे तक 46 मरीजों का पर्चा काटा गया.

इमरजेंसी वार्ड में बढ़ी मरीजों की भीड़

ओपीडी बंद रहने के कारण कई मरीज इमरजेंसी वार्ड में पहुंच गए. जरूरी इलाज कराने वाले मरीजों ने इमरजेंसी में पंजीकरण कराकर चिकित्सकीय परामर्श लिया. इसके चलते इमरजेंसी वार्ड में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ देखी गई.

दवा और निबंधन काउंटर खुले रहे

सदर अस्पताल में दवा वितरण काउंटर और निबंधन काउंटर खुले रहे. लेकिन ओपीडी सेवा बंद होने के कारण इन काउंटरों पर सामान्य दिनों जैसी भीड़ नहीं रही और अधिकांश समय खाली दिखाई दिए.

कार्रवाई नहीं होने पर भासा ने जताई नाराजगी

इस बीच बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के जिला इकाई के प्रतिनिधियों ने कहा कि अब तक हमलावरों और अस्पताल में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजी जाएगी और आगे भासा जो निर्णय लेगी, उसका पालन किया जाएगा.


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By Nishikant kumr

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