Jehanabad News: (सुनील कुमार की रिपोर्ट) घोसी प्रखंड के भारथु पंचायत अंतर्गत नंदना गांव स्थित झारखंडी नाथ मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है. ग्रामीणों के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम जरासंध वध के लिए राजगीर जा रहे थे. रास्ते में रात्रि होने पर तीनों ने इसी स्थान पर विश्राम किया. बताया जाता है कि अगले दिन पूजा-अर्चना के लिए यहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हो गया. जिसके बाद तीनों ने भगवान शिव की आराधना कर अपनी यात्रा आगे बढ़ाई.
जंगल में प्रकट हुआ था स्वयंभू शिवलिंग
स्थानीय लोगों के मुताबिक उस समय यह पूरा इलाका घने जंगल और झाड़ियों से घिरा हुआ था. जंगल के बीच शिवलिंग प्रकट होने के कारण ही इस स्थान का नाम ‘झारखंडी नाथ’ पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि यह शिवलिंग अनादि काल से मौजूद है और यहां सच्चे मन से पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सावन, महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ती है भीड़
मंदिर में सावन महीने, प्रत्येक सोमवार, महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त पहले फल्गु नदी में स्नान करते हैं और उसके बाद मंदिर में जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं. इन अवसरों पर यहां मेला भी लगता है. जिसमें आसपास के कई गांवों के लोग शामिल होते हैं.
अंग्रेजों के समय हुआ था मंदिर को लेकर विवाद
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेजी शासन काल में मंदिर को लेकर दो गांवों के बीच विवाद भी हुआ था. मामला बढ़ने पर तत्कालीन प्रशासन और कमिश्नर ने हस्तक्षेप किया. कहा जाता है कि प्रशासन ने मंदिर का पट बंद कर दिया और निर्णय भगवान शिव पर छोड़ दिया. अगले दिन जब मंदिर का पट खोला गया तो शिवलिंग उत्तर दिशा की ओर झुका हुआ मिला. इसके बाद विवाद समाप्त हो गया और मंदिर की प्रसिद्धि और बढ़ गई.
सड़क बदहाल, श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
इतनी धार्मिक मान्यता और श्रद्धा के बावजूद मंदिर तक पहुंचने वाले दोनों रास्ते काफी जर्जर बताए जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़क के कारण श्रद्धालुओं को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर क्षेत्र के विकास और सड़क मरम्मत की मांग की है.
आज भी श्रद्धा और आस्था का बड़ा केंद्र
झारखंडी नाथ मंदिर आज भी इलाके में धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां आम श्रद्धालुओं के साथ कई जनप्रतिनिधि और राजनीतिक हस्तियां भी समय-समय पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती रही हैं.
अंग्रेजों के समय हुआ था मंदिर को लेकर विवाद
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि मंदिर को लेकर दो गांवों के बीच विवाद अंग्रेजी शासन काल में भी हुआ था. मामला बढ़ने पर तत्कालीन प्रशासन और कमिश्नर ने हस्तक्षेप किया. कहा जाता है कि प्रशासन ने मंदिर का पट बंद कर दिया और निर्णय भगवान शिव पर छोड़ दिया. अगले दिन जब मंदिर का पट खोला गया तो शिवलिंग उत्तर दिशा की ओर झुका हुआ मिला. इसके बाद विवाद समाप्त हो गया और मंदिर की प्रसिद्धि और बढ़ गई.
सड़क बदहाल, श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
इतनी धार्मिक मान्यता और श्रद्धा के बावजूद मंदिर तक पहुंचने वाले दोनों रास्ते काफी जर्जर बताए जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़क के कारण श्रद्धालुओं को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर क्षेत्र के विकास और सड़क मरम्मत की मांग की है.
आज भी श्रद्धा और आस्था का बड़ा केंद्र
झारखंडी नाथ मंदिर आज भी इलाके में धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां आम श्रद्धालुओं के साथ कई जनप्रतिनिधि और राजनीतिक हस्तियां भी समय-समय पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती रही हैं.
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