Jehanabad News: जिले की प्रमुख नदियों दरधा, मोरहर और बलदाइया के जलस्तर में पिछले 24 घंटों के दौरान ढाई से तीन फीट की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है. पानी कम होने से जहानाबाद शहर सहित कई प्रमुख मुख्य मार्गों से बाढ़ का पानी उतर गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है. शहर के खान बहादुर रोड से पाठक टोली जाने वाली सड़क, होरीलगंज से प्रेम नगर तथा श्याम नगर से शक्ति नगर जाने वाले मार्गों से पानी पूरी तरह हट चुका है और इन पर सामान्य आवागमन बहाल हो गया है.
पुलों पर अब भी तेज बहाव, जान हथेली पर रख आवाजाही
नदियों का जलस्तर थोड़ा कम होते ही लोग सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर अपनी जान जोखिम में डालने लगे हैं. जहानाबाद शहर के जाफरगंज पुल, एसएस कॉलेज पुल तथा शकूराबाद बाजार के निकट बने पुलों पर अभी भी लगभग 3 फीट ऊंचा पानी तेज धारा के साथ बह रहा है. उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को इन पुलों पर 5 से 6 फीट तक पानी बह रहा था. जलस्तर थोड़ा घटते ही लोग जान हथेली पर रखकर इन पुलों के ऊपर से पैदल व दोपहिया वाहनों से गुजर रहे हैं, जहां जरा सा भी संतुलन बिगड़ने पर तेज बहाव में बहने का गंभीर खतरा बना हुआ है.
प्रशासन की चेतावनी और बैरिकेडिंग की अनदेखी
जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर इन सभी जलमग्न पुलों के दोनों छोरों पर मजबूत बैरिकेडिंग की गई है और आम नागरिकों को तेज धारा वाले पानी से दूर रहने की सख्त हिदायत दी जा रही है. इसके बावजूद लोग प्रशासनिक दिशा-निर्देशों और चेतावनियों को अनसुना कर बैरिकेडिंग लांघकर आवाजाही कर रहे हैं. राजाबाजार जाने वाली सड़क के कुछ हिस्सों में अब भी जलभराव बना हुआ है, जबकि जाफरगंज, गोरक्षणी, धनगामा, एसएस कॉलेज और डीएवी स्कूल आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं व आम राहगीरों को लंबा चक्कर काटकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है.
घरों में लौटने लगे लोग, खेतों में डूबी फसल से बढ़ी चिंता
जलस्तर घटने से जाफरगंज, होरीलगंज और अंबेडकर नगर के निचले इलाकों के कई घरों से पानी उतर गया है और विस्थापित परिवार अपने आशियानों में वापस लौटने लगे हैं. हालांकि, नदी किनारे स्थित घरों में अब भी पानी भरा हुआ है. जिले के पश्चिमी और दक्षिणी ग्रामीण इलाकों के चारों ओर और खेतों में अब भी भारी जलजमाव बना हुआ है, जिससे हजारों एकड़ में लगी धान की फसल डूबकर बर्बाद होने की कगार पर है. जहानाबाद की नदियों का जलस्तर पड़ोसी राज्य झारखंड के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर निर्भर है; यदि वहां दोबारा भारी बारिश होती है, तो नदियों में जलस्तर फिर से बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है.
