Jehanabad News: जिले में इस वर्ष मानसून की बेरुखी और सामान्य से 67 फीसदी कम बारिश के बावजूद अन्नदाताओं ने हिम्मत नहीं हारी. प्रकृति की प्रतिकूल परिस्थितियों, सूखे जैसी स्थिति और कृषि संसाधनों की भारी किल्लत से जूझते हुए जिले के मेहनतकश किसानों ने 100.06% धान रोपनी का लक्ष्य पूरा कर एक मिसाल कायम की है.
कृषि विभाग द्वारा जिले में इस वर्ष 50,845.55 हेक्टेयर भूमि पर धान रोपनी का आधिकारिक लक्ष्य निर्धारित किया गया था. इसके मुकाबले किसानों ने दिन-रात एक कर कुल 50,878.41 हेक्टेयर रकबे में धान की रोपनी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है.
सावन में भी सूखे रहे खेत, 67% कम बारिश ने बढ़ाई थी बेचैनी
जिले के लिए यह उपलब्धि किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी, क्योंकि चालू खरीफ सत्र के दौरान सामान्य से रिकॉर्ड 67% कम बारिश दर्ज की गई. आधा सावन बीत जाने के बावजूद खेतों में दरारें पड़ी थीं और आहर, पोखर, तालाब तथा चेकडैम पूरी तरह सूख चुके थे.
हालांकि बीच-बीच में हुई दो-तीन बार की हल्की बारिश ने किसानों के लिए संजीवनी का काम किया. पिछले सप्ताह हुई दो दिनों की बारिश के बाद किसानों ने तेजी दिखाते हुए जिले के 98% खेतों में रोपनी पूरी कर ली थी. इसके बाद शेष बचे 2% खेतों में भी किसानों ने निजी संसाधनों के बल पर रोपनी संपन्न कर ली.
80 से 90 फीट नीचे भागा जलस्तर, मोटर-पंप हुए फेल
कम बारिश के कारण जिले के ग्रामीण और सुदूर इलाकों में भूगर्भीय जलस्तर (Groundwater Level) 80 से 90 फीट नीचे खिसक गया है. इसके चलते:
- महंगे डीजल से चलने वाले पंपसेट थोड़ी देर चलकर पानी छोड़ दे रहे थे.
- 80 फीट की गहराई पर लगे बोरिंग और समरसेबल मोटर पानी फेंकने में पूरी तरह असमर्थ हो गए.
- किसानों को पानी निकालने के लिए मोटरों में अतिरिक्त पाइप जोड़कर गहराई बढ़ानी पड़ी.
गांवों से लेकर शहरों तक गहराया पेयजल संकट
भूगर्भीय जलस्तर के पाताल में जाने का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले में गंभीर पेयजल संकट भी उत्पन्न हो गया है. जिला मुख्यालय जहानाबाद सहित विभिन्न शहरी इलाकों व गांवों में चापाकल सूख गए हैं और घरेलू समरसेबल मोटरों से भी पानी आना बंद हो गया है. इन तमाम भीषण संकटों के बीच किसानों ने बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेजकर और अतिरिक्त लागत लगाकर धान की रोपनी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर दिखाया.
