नियम की अनदेखी: जिले के 90 प्रतिशत होटल व रेस्टोरेंट के पास फायर ब्रिगेड का एनओसी नहीं

Jahanabad News : हाल ही में दिल्ली के एक होटल में लगी भीषण आग में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत के बाद जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की सक्रियता बढ़ी है. जिले में होटलों, रेस्टोरेंटों और अन्य व्यावसायिक भवनों का सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.

जहानाबाद से संजय अनुराग की रिपोर्ट Jahanabad News : जिले के होटल, रेस्टोरेंट और विवाह भवनों में आने वाले ग्राहकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है. आग से बचाव के मामले में इन संस्थानों की स्थिति कई अस्पतालों और नर्सिंग होम से भी बदतर बताई जा रही है.

जानकारी के अनुसार जिले के लगभग 90 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बिना अग्निशमन विभाग के अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के संचालित हो रहे हैं. अधिकांश संचालकों ने एनओसी के लिए आवेदन तक नहीं किया है. जहां फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं, उनमें से कई की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है. कई स्थानों पर भवन के आकार के अनुरूप पर्याप्त संख्या में अग्निशमन उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं.

जिले में सिर्फ तीन होटल, रेस्टोरेंट व विवहा भवन के पास एनओसी

इसके बावजूद ऐसे होटल, रेस्टोरेंट और विवाह भवन धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं. अब तक इनके विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है. इससे प्रतीत होता है कि ग्राहकों की सुरक्षा की अनदेखी करने वालों को खुली छूट मिली हुई है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 30 होटल, रेस्टोरेंट और विवाह भवन संचालित हैं. इनमें से केवल तीन संस्थानों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त किया है, जबकि 27 संस्थान बिना एनओसी के चल रहे हैं.

अधिकांश जगहों पर फायर अलार्म भी नहीं

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र अरवल मोड़ के आसपास संचालित कई होटल और रेस्टोरेंट में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम बेहद खराब हैं. स्टेशन और काको मोड़ क्षेत्र के संस्थानों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई.

किसी भी होटल में हाइड्रेंट सिस्टम उपलब्ध नहीं मिला. अधिकांश स्थानों पर फायर अलार्म सिस्टम का भी अभाव है. कई संचालकों और कर्मचारियों को यह तक जानकारी नहीं है कि उनके यहां लगे अग्निशमन यंत्र कार्यशील हैं या नहीं.

कई होटल संकरे गलियारों में, आपदा में निकलना मुश्किल

होटलों में निकास व्यवस्था भी गंभीर चिंता का विषय है। अधिकांश भवनों में केवल एक ही मुख्य निकास द्वार है. पीछे या किनारे से आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है. कई होटलों में संकरे गलियारों के दोनों ओर कमरे बने हुए हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में बचाव कार्य बेहद कठिन हो सकता है.

जिले के अधिकांश होटलों में लिफ्ट की सुविधा नहीं है और एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए केवल एक सीढ़ी का उपयोग किया जाता है. कई कमरों की खिड़कियां बाहरी हिस्से की बजाय अंदरूनी गलियारों की ओर खुलती हैं. ऐसे में आग लगने की स्थिति में लोगों के पास संकरे गलियारों और सीढ़ियों के माध्यम से बाहर निकलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

एनओसी के लिए आवेदन करने का निर्देश दिए

जिला अग्निशमन पदाधिकारी स्नेही सोनल ने कई होटल, रेस्टोरेंट, विवाह भवन और निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया है. उन्होंने संचालकों को अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने तथा शीघ्र एनओसी के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है.

नियमों का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई

जिला अग्निशमन पदाधिकारी स्नेही सोनल ने कहा कि विभाग लगातार होटल, रेस्टोरेंट, विवाह भवन, निजी अस्पताल और क्लीनिकों का निरीक्षण कर रहा है. संचालकों को आग से बचाव के पर्याप्त उपाय सुनिश्चित करने और एनओसी के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया है. इसके बावजूद जो संस्थान नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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Published by: Rajeev Kumar

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