गलतफहमी . मोकर गांव के बधार में बादाम समझ कर खाया जंगली बीज
बधार में गये बच्चों ने बादाम समझ कर जंगली बीज खा लिया. इसे खाते ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. कुल 34 लोगों की हालत बिगड़ गयी. इनमें एक वृद्धा व एक वयस्क भी शामिल हैं. सभी को आनन-फानल में अस्पताल में भरती कराया गया. डॉक्टरों की टीम ने सबों का समुचित इलाज किया. सभी खतरे से बाहर बताये जाते हैं.
जहानाबाद (सदर) : सदर प्रखंड के मोकर गांव के बधार में मंगलवार को अपराह्न करीब तीन बजे जंगली बीज खाने से दो वयस्क सहित 34 लोग बीमार हो गये. विषाक्त बीज खाने से बीमार हुए लोगों में 32 बच्चे और बच्चियां हैं. सभी को इलाज के लिए यहां सदर अस्पताल में भरती किया गया है. पीड़ित बच्चे और अभिभावक महादलित परिवार के हैं. तबीयत बिगड़ने से सभी घबराहट में हैं, वे सहमे हुए हैं. डॉक्टरों की टीम ने सबों का समुचित इलाज किया. सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं.
माता-पिता गये थे फसल काटने : मोकर महादलित परिवार के लोग मजदूरी का काम करते हैं. मंगलवार को कई परिवारों के लोग समीप के ही गनसा बिगहा के खेत में मसूर फसल की कटनी करने गये थे.
अपराह्न में फसल की ढुलाई कर खलिहानमें पहुंचाया जा रहा था. उधर, उनके बच्चे-बच्चियां भी बधार में चले गये और जंगली बीज खा लिया जिससे वे बीमार पड़ गये. पीड़ितों में 70 वर्षीया दहिया देवी और 30 वर्षीया मनिया देवी के अलावा तीन से 14 वर्ष उम्र तक के बच्चे शामिल हैं. सदर अस्पताल में बीमार राधा कुमारी, रंजन दीपू, सरस्वती, स्मिता, बुचन, निभा, दीपक, अर्पणा, शमी, सोलू, शोभा, किसन, विरंजय, चमेला, चांदसी, सूरजा, अरुण, रिंकी, शिवा, चंदा, शिवशंकर, डौली और सुनयना और निशी कुमारी को इलाज के लिए भरती किया गया है.
काले रंग का था जंगली बीज : एक तरफ बच्चों के माता-पिता मजदूरी में लगे थे और दूसरी तरफ खेल-खेल में इन बच्चों ने बधार में लगे जंगली पौधे के काले रंग का बीज खाया. भारी मात्रा में गिरे हुए बीज को बच्चों ने उठाया और उसे फोड़ा.
भीतर उजले रंग का फल देख बच्चों ने बादाम समझ लिया और खाने लगे. खाने में मीठा लगने पर वृद्धा दहिया देवी और वयस्क मनिया देवी को भी खिलाया. बताया गया है कि बच्चों ने उसे फल समझ कर बीज के दाने खाये थाड़ी ही देर के भीतर सबों को उलटी (कै) होनी शुरू हो गयी. उनके अभिभावकों में बच्चों की हालत देख कर बेचैनी हो गयी. सूचना पाकर कड़ौना ओपी प्रभारी चंदन कुमार घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस और ग्रामीणों के सहयोग से पीड़ितों को इलाज के लिए यहां सदर अस्पताल में लाया गया.
