नेक काम कर लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं बाबा
जहानाबाद नगर : अब लावारिस लाशों का कौन बनेगा वारिस. शहर के गड़ेरिया खंड-शेखआलमचक के रहने वाले बाबा कमाल अब इस दुनिया में नहीं रहे. गरीब परिवारों के लिए खुदा तो नहीं, लेकिन खुदा से कम नहीं थे बाबा कमाल. जिले में बेकफन लाशों को कफन पहनाकर कब्रिस्तान पहुंचाने वाले बाबा कमाल कर्बला वाले अब इस दुनिया में नहीं रहे. उन्होंने बीती रात 80 वर्ष की उम्र में एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली. उन्हें हर्ट अटैक आया था, जिसके बाद अस्पताल में एडमिट कराया गया. मंगलवार की शाम स्थानीय ईदगाह में उनके जनाजे की नवाज पढ़ाई गयी.
इस मौके पर हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें कंधा दिया तथा कर्बला कब्रिस्तान में दफन किया गया. निहायत गरीब परिवार से आने वाले बाबा कमाल लावारिस लाशों का वारिस बनकर आखिरी विश्राम तक पहुंचाते थे. उन्होंने अब तक बड़ी संख्या में लावारिस लाशों को आखिरी विश्राम तक पहुंचाया है. वैसी लाश जो काफी क्षत-विक्षत होती थी उसे भी वह पूरी संजीदगी के साथ कफन पहनाकर कब्रिस्तान तक पहुंचाते थे. इसके लिए वह चंदा वसूला करते थे, जिससे कफन खरीद शव का क्रिया-कर्म करते थे. इस कार्य के लिए उन्हें काफी सराहना मिलती थी, लेकिन वे तारीफ मिलने पर कहते थे कि अल्लाह उनसे यह काम करा देता है.
फकीराना अंदाज में जीने वाले बाबा कमाल शहरवासियों के दिलों पर राज किया करते थे. उनके प्रयासों के बदौलत ही कर्बला का जीर्णोद्धार हुआ था. वे अपने काम के लिए कभी मशहूर होने नहीं चाहते थे. उन्हें तारीफ भी पसंद नहीं थी. उनका मानना था कि अल्लाह उनसे जो काम कराता है वही वह करते हैं. उनके जाने के बाद अब लावारिस लाशों को कफन कौन पहनायेगा… यह जिलेवासियों के दिलों-दिमाग में कौंध रहा है. बाबा कमाल की एक स्टोरी प्रभात खबर में लिखी गयी थी तुझमें रब दीखता है बाबा. सचमुच खुदा ने उन्हें लावारिस लोगों के लिए फरिश्ता बनाकर भेजा होगा जो नेक काम कर लोगों के दिलों में जिंदा हैं.
