स्टेशन का प्रतीक्षालय बदहाल शरणस्थली बना मुख्य द्वार !

कुव्यवस्था. आवाजाही के िलए झेलनी पड़ती है यात्रियों को परेशानी नहीं रहते एक भी टीटीई टिकटों की नहीं होती जांच जहानाबाद : दानापुर रेल मंडल के पटना-गया रेलखंड का जहानाबाद एक प्रमुख स्टेशन है, जहां यात्रा के दौरान सुविधाओं के लिए यात्री तरसते हैं. स्टेशन पर यात्रियों के हालात देखने के लिए शनिवार की देर […]

कुव्यवस्था. आवाजाही के िलए झेलनी पड़ती है यात्रियों को परेशानी

नहीं रहते एक भी टीटीई टिकटों की नहीं होती जांच
जहानाबाद : दानापुर रेल मंडल के पटना-गया रेलखंड का जहानाबाद एक प्रमुख स्टेशन है, जहां यात्रा के दौरान सुविधाओं के लिए यात्री तरसते हैं. स्टेशन पर यात्रियों के हालात देखने के लिए शनिवार की देर शाम प्रभात खबर की टीम ने स्टेशन का जायजा लिया. इस दौरान यह मामला दिखा कि ठंड के इस मौसम में दूर-दराज जानेवाले यात्री प्लेटफार्म पर ठिठुरते हुए ट्रेनों की प्रतीक्षा करते हैं. स्टेशन के प्रतीक्षालय की हालत ठीक नहीं थी. इस कारण शाम सात बजे से ही यात्रियों ने स्टेशन के मुख्य द्वार को ही अपना शयन स्थल बना रखा था. आवागमन के रास्ते पर लोग चादर ताने सोये हुए थे. इससे ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को गुजरने में परेशानी हो रही थी. गेट को शयन स्थल बनाने वाले लोगों को रास्ते से हटाने के लिए रेल पुलिस का कोई भी जवान नहीं था.
शौचालयों में लटके थे ताले
स्टेशन के प्लेटफाॅर्म नंबर एक से दक्षिण दिशा में प्रतीक्षालय है, जहां महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग दो शौचालयों की व्यवस्था तो है, लेकिन उसका लाभ यात्रियों को नहीं मिलता. शाम 7:05 मिनट पर दोनों टायलेट में ताले लटके थे. प्लेटफाॅर्म नंबर दो पर भी एक शौचालय की व्यवस्था है, जिसमें ताला लटक रहा था. जरूरतमंद यात्री शौचादि क्रिया से निवृत्त होने के लिए परेशान दिख रहे थे. ट्रेन छूट न जाये इस कारण दो महिला यात्री शौच के लिए स्टेशन से बाहर निकलने के बजाय रेलवे ट्रैक की ओर जा रही थीं.
नहीं हो रही थी टिकट की जांच
शाम 07:10 मिनट पर पटना से आयी इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन से सैकड़ों महिलाएं और पुरुष यात्री स्टेशन पर उतरे, जिनसे टिकट मांगने वाला कोई भी रेलवे कर्मी नहीं था. एक भी टीटीई प्लेटफाॅर्म पर नहीं दिखा. लोग बेधड़क स्टेशन से बाहर निकल रहे थे. वैसे यदा-कदा पटना से आये टीटीई ही टिकट की जांच करते हैं. रेलवे टिकट की जांच की स्थायी व्यवस्था स्टेशन पर नहीं है. सुरक्षा के लिहाज से रेल पुलिस भी प्लेटफाॅर्म पर नहीं दिख रही थी.
प्लेटफार्म नंबर तीन पर असुरक्षित थे यात्री
स्टेशन के प्लेटफाॅर्म नंबर तीन पर सुरक्षा को लेकर यात्री चिंतित थे. इस प्लेटफाॅर्म के पश्चिम दिशा से घेराबंदी नहीं है. असामाजिक तत्व का विचरण बेखौफ होते रहता है. प्लेटफॉर्म की घेराबंदी नहीं रहने से स्टेशन आम लोगों के लिए आवागमन का रास्ता बना रहता है. शनिवार की शाम प्लेटफाॅर्म नंबर तीन पर पुलिस का कोई भी जवान नहीं था. यात्री अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे थे.

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