दो करोड़ रुपये खर्च के बाद भी शहर में दूर नहीं हुआ अंधेरा

उदासीनता. रखरखाव नहीं होने से बेकार हुईं लाइटें शहर को जगमग रखने की योजना हो गयी फ्लॉप सौंदर्यीकरण पर लगा ग्रहण, सुधार के नहीं हो रहे उपाय जहानाबाद : शहर का सौंदर्यीकरण करने और शहर को रोशनी से जगमग करने के लिए तकरीबन दो करोड़ की लागत से विभिन्न चौराहों पर हाईमास्ट लाइटें और पटना-गया […]

उदासीनता. रखरखाव नहीं होने से बेकार हुईं लाइटें

शहर को जगमग रखने की योजना हो गयी फ्लॉप
सौंदर्यीकरण पर लगा ग्रहण, सुधार के नहीं हो रहे उपाय
जहानाबाद : शहर का सौंदर्यीकरण करने और शहर को रोशनी से जगमग करने के लिए तकरीबन दो करोड़ की लागत से विभिन्न चौराहों पर हाईमास्ट लाइटें और पटना-गया एनएच 83 के दोनों ओर एलईडी लाइटें लगायी गयी थीं. लेकिन रखरखाव के अभाव में लाइटों की रोशनी गायब हो गयी. शहर में लगायी गयी हाईमास्ट लाइटें और काको मोड़ से आंबेडकर चौक तक और गांधी मैदान के इलाके में लगायी गयी एलईडी लाइटें खराब हो गयीं. शहर से गुजरे एनएच के दोनों ओर 125 एलईडी लाइटें लगायी गयी थी. बतादें कि दो वर्ष पूर्व करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर शहर को जगमग करने की योजना फ्लॉप हो गयी.
लाइट लगाने के तीन माह बाद से ही शहर में अंधेरा छाने लगा. धीरे-धीरे एक-एक कर सभी लाइटों ने रोशनी देना बंद कर दिया. एक लाइट लगाने में 85 हजार रुपये व्यय किये गये थे. इस मद में पूर्व एक करोड़ 62 लाख से अधिक रुपये खर्च हुए थे. गंभीर बात यह है कि उक्त लाइटें देखरेख के अभाव में बेकार पड़ी हैं. सड़क पर अंधेरा छाया रहता है. वुडको एजेंसी ने एलईडी लाइटें लगा कर ंंदो वर्ष के बाद नगर पर्षद के अधीन किया था, लेकिन शुरुआती दौर से ही गुणवत्ता की कमी रहने के कारण एलईडी लाइटें अक्सर खराब होते रही.
यह भी बताया गया है कि फिलहाल विगत छह माह से सभी लाइटें तकनीकी गड़बड़ी के कारण बंद है. इसका परिणाम यह हो रहा है कि शहर से गुजरे एनएच पर पैदल चलने वाले लोगों को शाम ढलते ही अंधेरे में आवागमन करना पड़ रहा है. अप्रिय घटना की संभावना से वह भयभीत रहते हैं. लाइटों को दुरुस्त करने के लिए नप द्वारा प्रयास नहीं किया जा रहा है. दीपावली के मौके पर ध्यान दिया गया था तो सड़क के एक किनारे की कुछ लाइटें जली थी और छठ के बाद फिर से खराब पड़ी है.
इन जगहों पर बेकार हैं हाईमास्ट लाइटें
अरवल मोड़, काको मोड़, अस्पताल मोड़, मलहचक मोड़, गांधी मैदान, राजाबाजार, हाट एरिया में हाईमास्ट लाइटें लगायी गयी थी. एक लाइट की कीमत 8-10 लाख रुपये थी. शुरुआती दौर में उक्त इलाके में दूर-दूर तक सोडियम रोशनी बिखेरती थी. शहर सुंदर दिखता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. उक्त सभी स्थानों पर लगायी गयी हाईमास्ट लाइटें बेकार पड़ी हैं.
इसे दुरुस्त करने की दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. कभी सुंदर दिखने वाला शहर महीनों से अंधेरे में डूबा हुआ है. यदि इन लाइटों को सुधार करने के लिए सार्थक कदम उठाये गये तो शहर का लुक बदल जायेगा. चारों ओर रोशनी ही रोशनी दिखेगी. शहरवासियों को आवागमन में काफी सहूलियत होगी.

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