रेलवे स्टेशन परिसर है या कचरा घर

जहानाबाद : यदि किसी को केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान की वास्तविक स्थिति देखनी है तो वह जहानाबाद रेलवे स्टेशन के परिसर में आ जाएं. वहां उन्हें यह स्पष्ट दिखेगा कि रेलवेकर्मियों के उपेक्षापूर्ण रवैये से केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना का कैसा मखौल उड़ाया जा रहा है. पूरे परिसर में गंदगी ही गंदगी […]

जहानाबाद : यदि किसी को केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान की वास्तविक स्थिति देखनी है तो वह जहानाबाद रेलवे स्टेशन के परिसर में आ जाएं. वहां उन्हें यह स्पष्ट दिखेगा कि रेलवेकर्मियों के उपेक्षापूर्ण रवैये से केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना का कैसा मखौल उड़ाया जा रहा है. पूरे परिसर में गंदगी ही गंदगी है. स्टेशन प्रांगण से अवैध कब्जा हटने के बाद गंदगी का दृश्य और उभर गया है. वहां कभी भी झाड़ू नहीं लगायी जाती.

नियमित सफाई नहीं होने से स्टेशन के तीनों प्लेटफाॅर्म, रेलवे ट्रैक और टिकट घर के समीप भी कचरा जमा रहने से वहां जाने में यात्री बचते हैं. रेलवे के अधिकारी भले ही चार रेगुलर सफाईकर्मियों द्वारा सफाई कराने का दावा करते हैं, लेकिन यह कड़वा सत्य है कि स्टेशन परिसर में कभी भी न तो झाड़ू लगायी जाती है और न ही जमे कचरे का उठाव किया जाता है. स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार से ही आवागमन करने वाले यात्री गंदगी से जूझते हैं.

बरसात के दिनों में तो स्थिति एकदम नरक हो जाती है. परिसर के वाहन पड़ाव से तो दुर्गंध उठती है. गंदे पानी का जमाव रहने और पड़ाव को मूत्रालय बना देने से वहां भीषण गंदगी है. इस समस्या के समाधान के कोई उपाय नहीं किये जाने से यात्रियों में व्यवस्था के प्रति क्षोभ है. स्टेशन को साफ-सुथरा रखने का डीआरएम का आदेश बेअसर साबित हो रही है.

सफाई के लिए एजेंसी को दी गयी है जिम्मेदारी, 16 माह से नहीं हुआ टेंडर
स्टेशन परिसर, प्लेटफाॅर्म और रेलवे ट्रैक को साफ रखने के लिए पहले सफाई एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. उसका टेंडर वर्ष 2016 के जून माह में ही समाप्त हो चुका है. पहले प्रतिदिन कामगारों द्वारा झाड़ू लगाने और कचरे का उठाव किया जाता था, लेकिन टेंडर समाप्त होने के बाद अब ऐसा नहीं होता. फिलहाल सफाई के लिए रेलवे के स्थानीय अधिकारियों को इम्प्रेस्ट मनी के रूप में प्रति माह 30 हजार रुपये दिये जाते हैं जो नियमित सफाई के लिए पर्याप्त नहीं कहा जाता. उन रुपयों से प्लेटफाॅर्म पर तो सफाई होती है लेकिन अनियमित ढंग से. गंदगी के ढेर लग जाने के बाद प्लेटफाॅर्म और टिकट घर के आसपास तो सफाईकर्मी झाड़ू लगाते हैं परंतु स्टेशन परिसर के बड़े भाग को सफाई से बिल्कुल अछूता रखा जाता है.
प्रदत्त राशि से नियमित सफाई कराना संभव नहीं
संपूर्ण स्टेशन परिसर, तीनों प्लेटफाॅर्म, रेलवे ट्रैक, टिकट घर एवं विभिन्न कार्यालयों में सफाई कराने के लिए चार नियमित कामगार हैं, लेकिन इम्प्रेस्ट मनी के रूप में जो 30 हजार रुपये मिलते हैं उससे सभी जगहों पर सफाई कराना संभव नहीं हो रहा है. नियमित सफाई कराने में परेशानी हो रही है. स्वच्छता के प्रति मैं खुद जागरूक रहता हूं. कामगारों के साथ खुद भी सफाई करने में जुट जाता हूं.
चौधरी नरेंद्र कुमार, स्टेशन प्रबंधक

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