जमुई. पति के दीर्घायु, पुत्र की प्राप्ति और उसके कुशल क्षेम के लिए, सोलह शृंगार कर अखंड सौभाग्य के लिए जिले भर की सुहागिन महिलाएं 26 मई सोमवार को शुभ संयोग में वट सावित्री पूजन करेंगी. इस पर्व को लेकर जिले भर में वट वृक्ष के पास पूजा करने वाली सुहागिन महिलाओं की भीड़ भी नजर आयेगी. पुजारी वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा कराएंगे. महिलाएं मंत्रोच्चार के बीच पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना करेंगी.
सोमवार को पूजा के लिए बन रहे हैं मंगल योग
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोहर आचार्य के अनुसार इस वर्ष 26 मई साेमवार काे ही वट सावित्री व्रत मनाना श्रेयस्कर हाेगा. साेमवार का दिन हाेने से सोमवती अमावस्या के साथ इस बार वट सावित्री पूजा के दाैरान कई संयाेग बन रहे हैं. साेमवती अमावस्या के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि याेग और त्रिग्रही योग बन रहा है. इस दिन बरगद-पीपल वृक्ष को पूजने से शनि, मंगल, राहू के अशुभ प्रभाव दूर होंगे. वट वृक्ष के नीचे सावित्री सत्यवान की कथा सुननी चाहिए. एक साथ कई संयोग बनने से व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं के घर-परिवार में सुख-शांति का अत्यंत मंगलकारी योग बन रहा है. उन्होंने बताया कि सोमवार को वट सावित्री व्रत की पूजा-अर्चना करने का शुभ मुहूर्त 10:45 से दोपहर 1:35 है.क्या हैं मान्यताएं
पौराणिक गाथाओं के अनुसार, सबसे पहले सावित्री ने अपने पति सत्यवान की प्राणाें की रक्षा के लिए यह व्रत रखा था. उसकी पूजा से प्रसन्न हाेकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लाैटा दिये थे. वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्नाजी, तने में विष्णु जी और डालियों-पत्तियों में भगवान शिव का वास होता है. इसलिए महिलाएं वट के जड़ में कच्चा सूत लपेटकर 108 बार परिक्रमा करती हैं. विवाहित महिलाओं का मानना है कि वट पूजा से अखण्ड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है.अमर सुहाग की होती है कामना
वट सावित्री पूजन कर सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग व संतान की दीर्घायु की कामना करती हैं. वट वृक्ष के नीचे बैठकर शिव गौरी व ब्रह्माणी स्वरूप माता सावित्री की पूजा की जाती है. इसमें सभी प्रकार के ऋतु फल, पंखा एवं जल का चढ़ावा चढ़ाया जाता है. सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण करते हुए अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है. वर्तमान पीढ़ियों को इस व्रत से स्त्री के कर्तव्य, पति-प्रेम एवं दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को संभव बनाने की शिक्षा मिलती है.वट सावित्री पूजन व्रत में आम और लीची है प्रधान
वट सावित्री पूजन में आम और लीची का प्रसाद में होना आवश्यक होता है. इस दिन बांस के बने पंखे का भी वट सावित्री पूजन में विशेष प्रयोग होता है. इस पूजा में सुहागिन महिलाओं को एक दिन पूर्व से ही नियम में रहकर अरवा चावल का भोजन करना चाहिए. इसके बाद पूजन के दिन स्नान आदि क्रियाओं से निवृत्त होकर नये वस्त्र धारण करें. इसके बाद वट वृक्ष का विधिवत पंचोपचार पूजन कर परिक्रमा करते हुए धागे को बांधना चाहिए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
