ऐतिहासिक राजमहल के पीछे का तालाब बना कूड़ाघर, बदबू और गंदगी से लोग परेशान

जमुई के पतसंडा पंचायत स्थित ऐतिहासिक राजमहल तालाब उपेक्षा और प्रदूषण का शिकार हो रहा है. दुकानदार और ठेला संचालक लगातार कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं, जिससे तालाब एक डंपिंग यार्ड बनता जा रहा है. इससे न केवल स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है.

Jamui News: गिद्धौर (जमुई). प्रखंड मुख्यालय की पतसंडा पंचायत स्थित ऐतिहासिक राजमहल के पीछे का तालाब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. वर्षों से उपेक्षा और लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण तालाब की स्थिति बदहाल हो गई है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाजार क्षेत्र के दुकानदार और कुछ ठेला संचालक प्रतिदिन यहां कूड़ा-कचरा और मांस-मछली का अपशिष्ट फेंक रहे हैं, जिससे पूरा इलाका दुर्गंध और गंदगी की चपेट में है.

कूड़े का डंपिंग यार्ड बनता जा रहा तालाब

स्थानीय लोगों के अनुसार पतसंडा बाजार और आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा लगातार तालाब में डाला जा रहा है. इसके कारण तालाब का जल प्रदूषित हो गया है और धीरे-धीरे इसका प्राकृतिक स्वरूप समाप्त होता जा रहा है. बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है.

श्रद्धालुओं को भी उठानी पड़ रही परेशानी

तालाब के पास से होकर ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर का मार्ग गुजरता है. प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु संध्या आरती में शामिल होने मंदिर पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि तालाब के आसपास फैली गंदगी और बदबू के कारण उन्हें नाक पर रुमाल रखकर मंदिर तक जाना पड़ता है.

कभी मछली पालन और पेयजल का था प्रमुख स्रोत

ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब कभी मछली पालन का प्रमुख केंद्र था. इसके अलावा आसपास के पशुओं के लिए भी यह महत्वपूर्ण पेयजल स्रोत माना जाता था. लेकिन पिछले करीब ढाई दशकों में लगातार उपेक्षा और प्रदूषण के कारण इसकी उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई है.

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब में प्लास्टिक, सड़े-गले कचरे और अन्य अपशिष्ट जमा होने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है. इससे पर्यावरण के साथ-साथ आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

तालाब संरक्षण की उठी मांग

Jamui News: क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों ने प्रशासन से तालाब की नियमित सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था तथा जलाशय को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कराने की मांग की है. उन्होंने आम लोगों से भी सार्वजनिक जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की.


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लेखक के बारे में

By कुमार सौरभ

कुमार सौरभ प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. गिद्धौर (जमुई) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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