बिहार सरकार के पीएचईडी मंत्री सह जमुई जिले के प्रभारी मंत्री संजय कुमार सिंह ने शुक्रवार की देर रात जमुई सदर अस्पताल का अचानक औचक निरीक्षण किया. आधी रात को अस्पताल पहुंचे मंत्री के इस औचक दौरे से स्वास्थ्य महकमे और अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया. निरीक्षण के दौरान नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में डॉक्टर की गैरमौजूदगी और ब्लड बैंक में कर्मियों की भारी लापरवाही सामने आने पर प्रभारी मंत्री का पारा चढ़ गया. उन्होंने मौके पर ही सिविल सर्जन (CS) डॉ. अशोक कुमार सिंह को कड़ी फटकार लगाई और अस्पताल की कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए.
इमरजेंसी से लेकर SNCU तक हर वार्ड का लिया जायजा
प्रभारी मंत्री ने अस्पताल के चप्पे-चप्पे पर पहुंचकर मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखी:
- विभिन्न इकाइयों की जांच: उन्होंने सबसे पहले इमरजेंसी कक्ष, इसके बाद एसएनसीयू (SNCU), ब्लड बैंक, प्रसव कक्ष (लेबर वार्ड) और जनरल वार्ड का बारीकी से निरीक्षण किया.
- मरीजों से सीधा संवाद: भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर उन्होंने अस्पताल में मिलने वाली दवाओं, भोजन और डॉक्टर की उपलब्धता को लेकर फीडबैक लिया.
- ड्यूटी रोस्टर की जांच: अस्पताल में तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के आधिकारिक ड्यूटी रोस्टर की जांच की गई ताकि यह देखा जा सके कि रोस्टर के मुताबिक डॉक्टर मौके पर मौजूद हैं या नहीं.
SNCU से डॉक्टर गायब, ब्लड बैंक में सोते मिले एंबुलेंस कर्मी
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमियां और लापरवाही उजागर हुईं:
- SNCU में नहीं मिले डॉक्टर: नवजात शिशुओं की जान बचाने के लिए सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली एसएनसीयू यूनिट में कोई भी ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं पाया गया, जिस पर मंत्री ने सख्त एतराज जताया.
- ब्लड बैंक में लापरवाही: ब्लड बैंक के निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस कर्मी सोते हुए पाए गए, जिस पर अस्पताल प्रबंधन से तत्काल जवाब-तलब किया गया.
- सिविल सर्जन को फटकार: मंत्री संजय कुमार सिंह ने सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह को दो टूक कहा कि गंभीर मरीजों और बच्चों के इलाज में ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
डॉक्टरों की कमी पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट, बहाली का दिया भरोसा
निरीक्षण के दौरान सदर अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी का मामला भी उठा:
- लिखित रिपोर्ट तलब: प्रभारी मंत्री ने सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि अस्पताल में चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की वर्तमान कमी का पूरा ब्यौरा लिखित रूप में उपलब्ध कराएं.
- सरकार स्तर पर पहल: उन्होंने आश्वस्त किया कि खाली पदों पर तैनाती और नई बहाली के लिए राज्य सरकार के स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि जिले के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.
साफ-सफाई और रोस्टर का सख्ती से पालन करने का अल्टीमेटम
मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन को बुनियादी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए:
"सरकारी अस्पतालों में आने वाले लोग पहले से ही गंभीर बीमारियों और परेशानियों से जूझ रहे होते हैं. उन्हें स्वच्छ वातावरण, सम्मानजनक व्यवहार और बेहतर चिकित्सा सुविधा देना स्वास्थ्य प्रशासन का पहला दायित्व है. रोस्टर का उल्लंघन करने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी."
निरीक्षण के दौरान लोजपा (रा) जिलाध्यक्ष जीवन सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. देर रात हुए इस निरीक्षण के बाद अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है.
