जमुई, खैरा. खैरा प्रखंड के दक्षिणी इलाके को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ललदैया कॉजवे क्षतिग्रस्त हो गया है. इसके साथ ही गरही, दरिमा, कुड़वाटांड़, गोली, भीमाइन समेत कई पंचायतों के लाखों लोगों के सामने आवागमन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. दक्षिणी क्षेत्र के लोगों के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले इस कॉजवे के टूटने से खैरा प्रखंड मुख्यालय से इन इलाकों का सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है. अब ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा और कई जगहों पर उन्हें 5 से 6 किलोमीटर से लेकर करीब 10 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है.
कॉजवे टूटते ही बढ़ी चिंता, स्कूली बच्चों से मरीजों तक की बढ़ेगी परेशानी
ललदैया कॉजवे का क्षतिग्रस्त होना सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला है. स्कूली छात्र-छात्राओं, किसानों, मजदूरों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है. दक्षिणी इलाके के बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रतिदिन इसी रास्ते से खैरा प्रखंड मुख्यालय पहुंचते हैं. आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. वहीं किसानों को अपनी उपज लेकर बाजार और मजदूरों को काम के लिए दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचने में अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी. ग्रामीणों का कहना है कि वैकल्पिक रास्ते लंबा होने के साथ कई जगहों पर सुविधाजनक भी नहीं हैं.
22 साल पहले बना था कॉजवे, पहले से ही जर्जर थी हालत
गिद्धेश्वर और पूर्वतार के बीच स्थित ललदैया कॉजवे का निर्माण करीब 22 वर्ष पहले जल संसाधन विभाग की ओर से कराया गया था. बताया जाता है कि इसके निर्माण पर करीब 344 लाख रुपये खर्च हुए थे. समय बीतने के साथ कॉजवे की स्थिति लगातार खराब होती गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका. कॉजवे की जर्जर स्थिति को देखते हुए पहले ही भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई गई थी. इसके बावजूद स्थानीय लोगों की मजबूरी थी कि वे इसी रास्ते से आवागमन करते रहें. अब इसके क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों की मुश्किल कई गुना बढ़ गई है.
टूटे हिस्से में फंसी बाइक, बाल-बाल बचा बाइक सवार
कॉजवे के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. इसी दौरान क्षतिग्रस्त हिस्से से आवागमन करने के दौरान एक बाइक नदी में फंस गई. हालांकि बाइक सवार किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल गया.
इस घटना के बाद ग्रामीणों में हादसे को लेकर डर और बढ़ गया है. लोगों का कहना है कि यदि तत्काल सुरक्षित व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. खासकर रात के समय इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों के लिए खतरा और अधिक बढ़ सकता है.
बगल में बन रहा नया पुल, दो-तीन साल से अधूरा पड़ा निर्माण
ललदैया कॉजवे के क्षतिग्रस्त होने के बाद परेशानी इसलिए भी गंभीर हो गई है क्योंकि इसके ठीक बगल में नए पुल का निर्माण पिछले दो-तीन वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है. ग्रामीणों के अनुसार यदि नए पुल का निर्माण समय पर पूरा कर दिया जाता तो पुराने कॉजवे के क्षतिग्रस्त होने के बाद आवागमन को लेकर ऐसी गंभीर स्थिति नहीं बनती. लोग लंबे समय से नए पुल के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है.
नया पुल नहीं बना, पुराना कॉजवे भी जवाब दे गया
दक्षिणी क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए मौजूदा स्थिति दोहरी परेशानी जैसी है. एक ओर पुराना कॉजवे क्षतिग्रस्त होकर आवागमन के लिए खतरा बन गया है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक सुविधा के तौर पर तैयार किया जा रहा नया पुल वर्षों से अधूरा पड़ा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि नए पुल का निर्माण पूरा हो जाता तो क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन का स्थायी विकल्प मिल जाता. लेकिन निर्माण में देरी के कारण अब पुराना कॉजवे भी जवाब दे चुका है.
खैरा में तीसरा प्रमुख पुल क्षतिग्रस्त, व्यवस्था पर उठे सवाल
ललदैया कॉजवे के क्षतिग्रस्त होने के बाद खैरा प्रखंड में प्रमुख पुलों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले नरियाना और मांगोबंदर पुल भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. इन स्थानों पर भी नए पुलों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है. एक के बाद एक महत्वपूर्ण पुलों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण इलाकों में आवागमन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. खासकर खैरा के दक्षिणी हिस्से के लोग पहले से ही बुनियादी सुविधाओं और बेहतर सड़क संपर्क को लेकर परेशान हैं. अब ललदैया कॉजवे के क्षतिग्रस्त होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगा तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नए पुल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक लोगों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था की जानी चाहिए.
साथ ही वर्षों से अधूरे पड़े नए पुल के निर्माण कार्य को तेजी से पूरा कराने की मांग की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि गरही, दरिमा, कुड़वाटांड़, गोली, भीमाइन समेत दक्षिणी क्षेत्र की पंचायतों के लोगों को प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लंबा और असुरक्षित रास्ता तय करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
अब नए पुल के निर्माण पर टिकी दक्षिणी इलाके की उम्मीद
ललदैया कॉजवे के क्षतिग्रस्त होने से एक बार फिर यह सवाल सामने आ गया है कि ग्रामीण इलाकों में महत्वपूर्ण पुल और कॉजवे की समय पर मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई. फिलहाल दक्षिणी इलाके के लोगों के लिए सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित आवागमन की है. ग्रामीणों की मांग है कि क्षतिग्रस्त कॉजवे को लेकर तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए, हादसे की आशंका वाले हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था की जाए और नए पुल का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए. इससे क्षेत्र के लोगों को प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिल सकेगी.
