जमुई जिले के चकाई प्रखंड अंतर्गत माधोपुर पंचायत का लख्मीडीह गांव आज भी विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर है. लगभग 200 की आबादी वाला यह गांव बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली के आंसू रो रहा है. गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक जाने के लिए कच्चे रास्तों और पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है.
बरसात में कीचड़ में तब्दील हो जाती है पगडंडी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि गांव में अब तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है. बरसात का मौसम शुरू होते ही गांव जाने वाली पगडंडी कीचड़ से सन जाती है, जिससे पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है. सड़क के अलावा गांव में जल निकासी के लिए नाला, हर घर नल-जल योजना और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी अति आवश्यक सुविधाओं का भी घोर अभाव है. नाला नहीं होने से बारिश के पानी का भराव बना रहता है. वहीं, लाइट न होने के कारण रात होते ही गांव की गलियों में अंधेरा छा जाता है, जिससे विषैले जीवों का खतरा बना रहता है.
जनप्रतिनिधियों से गुहार बेअसर, ग्रामीणों में नाराजगी
गांव के प्रकाश तुरी, परशुराम सिंह और मुकेश तुरी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं. इसके बावजूद अब तक किसी ने भी धरातल पर सुध नहीं ली है. ग्रामीणों का आरोप है कि देश की आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी उन्हें सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी प्राथमिक जरूरतों के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है.
मुखिया बोले: जंगल भूमि के कारण फंसा है पेच
मामले में माधोपुर पंचायत के मुखिया पंकज कुमार साह ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि पंचायत स्तर से लख्मीडीह गांव में सड़क निर्माण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण के मार्ग में वन विभाग (जंगल भूमि) से जुड़ी तकनीकी और कानूनी अड़चनें आ रही हैं, जिसकी वजह से कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है. इस संबंध में संबंधित विभाग को पत्राचार किया गया है और विभागीय स्तर पर जल्द अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त कर समस्या के समाधान की कोशिश जारी है.
