जमुई अंचल कार्यालय के समानांतर चल रहा था सिस्टम? CSC से मिले दाखिल-खारिज के 30 आवेदन, जांच शुरू

जमुई के खैरा में एक सीएससी सेंटर से जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े दस्तावेज और राजस्व अभिलेख मिलने से हड़कंप मच गया है. इस मामले ने सरकारी व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

Khaira Jamui CSC Case: जमुई में जमीन के दाखिल-खारिज से लेकर राजस्व अभिलेखों तक का काम सरकारी अंचल कार्यालय और अधिकृत कर्मियों के जिम्मे होता है. लेकिन जमुई के खैरा में अंचल कार्यालय परिसर स्थित एक सीएससी सेंटर से जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और राजस्व अभिलेख मिलने के बाद व्यवस्था पर ही सवाल उठने लगे हैं.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंचल कार्यालय से जुड़े दस्तावेज आखिर सीएससी सेंटर तक पहुंचे कैसे? क्या यह केवल लापरवाही का मामला है या इसके पीछे जमीन से जुड़े कामकाज का कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आयेगा.

बीते गुरुवार को अनुमंडल पदाधिकारी सौरभ कुमार ने खैरा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर स्थित सीएससी सेंटर में छापेमारी की थी. कार्रवाई के दौरान वहां दाखिल-खारिज से जुड़े करीब 30 आवेदन, जमीन से संबंधित दस्तावेज और अंचल कार्यालय के राजस्व अभिलेख बरामद होने की बात सामने आयी.

इसके बाद सीएससी संचालक प्रवीण कुमार को पूछताछ के लिए अंचल कार्यालय लाया गया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया गया.

सीएससी में मिले सरकारी काम से जुड़े दस्तावेज, यहीं से शुरू हुआ सवाल

सीएससी यानी कॉमन सर्विस सेंटर का इस्तेमाल आम लोगों को कई सरकारी और ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है. लेकिन खैरा के इस सेंटर से अंचल कार्यालय के कामकाज से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद मामला सामान्य सेवा केंद्र से आगे बढ़कर जांच का विषय बन गया है.

छापेमारी में दाखिल-खारिज के करीब 30 आवेदन मिलने की बात कही गयी है. इसके अलावा जमीन से जुड़े दस्तावेज और राजस्व अभिलेख भी बरामद किये गये.

ऐसे में जांच का अहम बिंदु यह होगा कि ये कागजात सीएससी सेंटर तक किस माध्यम से पहुंचे और वहां इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था.

सरकारी दस्तावेज निजी परिसर तक पहुंचने की जांच

राजस्व अभिलेख जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े सरकारी रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं. ऐसे दस्तावेजों की सुरक्षा और उनके इस्तेमाल को लेकर विभागीय स्तर पर निगरानी जरूरी होती है.

खैरा के मामले ने इसी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है.

अगर अंचल कार्यालय से जुड़े दस्तावेज किसी निजी परिसर में मौजूद थे, तो यह पता लगाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा कि उन्हें वहां ले जाने की अनुमति किसने दी थी. क्या किसी अधिकृत कर्मचारी की इसमें भूमिका थी या दस्तावेज किसी दूसरे माध्यम से वहां पहुंचे, यह भी जांच के बाद स्पष्ट होगा.

2023 का मामला फिर क्यों आया चर्चा में?

खैरा की घटना ने जमुई में सामने आये वर्ष 2023 के एक पुराने मामले की याद भी ताजा कर दी है.

उस समय जमुई शहर में एक कथित फर्जी राजस्व कर्मचारी के ठिकाने पर छापेमारी हुई थी. कार्रवाई के दौरान अंचल कार्यालय से जुड़े अभिलेख, राजस्व कर्मचारी का डोंगल, लैपटॉप और अन्य दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आयी थी.

जांच में यह भी सामने आया था कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से खुद को राजस्व कर्मचारी बताकर जमीन से जुड़े काम कर रहा था. उस मामले में एक वास्तविक राजस्व कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आयी थी.

अब खैरा में सीएससी सेंटर से राजस्व अभिलेख मिलने के बाद पुराने मामले से इसकी तुलना की जा रही है. हालांकि दोनों मामलों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है.

क्या जमीन के काम का कोई समानांतर सिस्टम चल रहा था?

ताजा मामले ने सबसे बड़ा सवाल जमीन से जुड़े सरकारी कामकाज की निगरानी को लेकर खड़ा किया है.

अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज, जमीन के रिकॉर्ड और राजस्व संबंधी काम के लिए निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत कर्मचारी होते हैं. ऐसे में यदि इन्हीं कामों से जुड़े दस्तावेज किसी सीएससी सेंटर में मौजूद मिले, तो यह जानना जरूरी है कि वहां किस स्तर तक सरकारी प्रक्रिया की जानकारी या पहुंच थी.

जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती होगी कि सीएससी संचालक को दस्तावेज कहां से मिले और उनका इस्तेमाल किस काम के लिए किया जा रहा था.

मोबाइल में जमीन से जुड़े चैट और लेनदेन की भी जांच

मामले की जांच के दौरान मोबाइल में जमीन से संबंधित बातचीत और लेनदेन से जुड़े चैट मिलने की बात भी सामने आयी है.

यदि इन चैट और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच में कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है, तो उससे पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है.

इसी कारण जब्त किये गये मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इन उपकरणों से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि किन लोगों से संपर्क था और जमीन से जुड़े किस तरह के काम के लिए बातचीत की जा रही थी.

जांच बताएगी लापरवाही थी या बड़ा नेटवर्क

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामला केवल सरकारी दस्तावेजों के अनधिकृत इस्तेमाल तक सीमित था या इसके पीछे जमीन से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी.

जांच में जब्त दस्तावेजों, कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल की पड़ताल के साथ-साथ संबंधित लोगों से पूछताछ भी महत्वपूर्ण होगी.

यह भी देखा जाना है कि दस्तावेज किसके नाम से जुड़े हैं, उनके आधार पर कोई काम कराया गया या नहीं और किसी व्यक्ति से पैसे का लेनदेन हुआ था या नहीं.

Khaira Jamui CSC Case: प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल निगरानी का

खैरा की घटना केवल एक सीएससी सेंटर तक सीमित मामला नहीं है. इसने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अंचल कार्यालय में रखे संवेदनशील राजस्व अभिलेखों की निगरानी कितनी प्रभावी है.

वर्ष 2023 में भी राजस्व व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज और उपकरण कथित फर्जी राजस्व कर्मचारी के ठिकाने से बरामद हुए थे. अब एक बार फिर अंचल से जुड़े अभिलेख निजी परिसर में मिलने से व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

फिलहाल प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी दस्तावेज सीएससी सेंटर तक किस रास्ते से पहुंचे.

खैरा मामले की जांच का परिणाम न केवल मौजूदा प्रकरण की तस्वीर साफ करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि जमीन से जुड़े संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा व्यवस्था में आखिर चूक कहां हुई.

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लेखक के बारे में

By गुलशन कश्यप

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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