ट्रेन पर पत्थर फेंकना और बेवजह चेन पुलिंग पड़ सकता है भारी, झाझा के गांवों में रेलवे ने चलाया जागरूकता अभियान

रेलवे सुरक्षा को लेकर झाझा में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया. चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी और बेवजह चेन पुलिंग जैसे अपराधों के प्रति ग्रामीणों को सचेत किया गया.

Jhajha Railway Safety: चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकना, बिना वजह चेन पुलिंग करना या रेलवे के सिग्नल और सुरक्षा उपकरणों से छेड़छाड़ करना सिर्फ शरारत नहीं, बल्कि गंभीर अपराध है. इन गतिविधियों से यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है और ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित होता है.

इसी को लेकर रेलवे की रेल साथी योजना के तहत झाझा में जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर लोगों को जागरूक किया. गिधौर, चौरा, सेवा सहित आसपास के गांवों में चलाये गये अभियान के दौरान ग्रामीणों और आम रेल यात्रियों को रेल संपत्ति की सुरक्षा, रेल ट्रैक संरक्षण और यात्री सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गयी.

अभियान का उद्देश्य सिर्फ लोगों को नियम बताना नहीं था, बल्कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी रहा.

गांव-गांव पहुंची जीआरपी और आरपीएफ की टीम

राजकीय रेल झाझा थानाध्यक्ष मधुसूदन कुमार और आरपीएफ पोस्ट कमांडर आरआर सहाय के नेतृत्व में जागरूकता अभियान चलाया गया.

टीम ने ग्रामीणों को रेलवे से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ट्रैक और संपत्ति की सुरक्षा के साथ सुरक्षित रेल परिचालन के लिए आम नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.

रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले ग्रामीण अक्सर ऐसी गतिविधियों को सबसे पहले देख सकते हैं. ऐसे में किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना समय पर मिलने से संभावित दुर्घटना या रेलवे संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सकता है.

संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को बताएं

आरपीएफ पोस्ट कमांडर आरआर सहाय ने ग्रामीणों से अपील की कि रेलवे से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस या रेलवे सुरक्षा बल को दें.

उन्होंने कहा कि रेलवे की संपत्ति और सुरक्षित रेल परिचालन केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें आम नागरिकों की सहभागिता भी जरूरी है.

ग्रामीणों से रेलवे ट्रैक के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने और रेलवे की किसी भी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की गयी.

चलती ट्रेन पर पत्थरबाजी क्यों है खतरनाक?

आरपीएफ अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने से यात्रियों की सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है.

ट्रेन की गति अधिक होने के कारण बाहर से फेंका गया पत्थर खिड़की या शीशे से टकराकर यात्री को गंभीर रूप से घायल कर सकता है. इसके अलावा ऐसी घटनाओं से ट्रेन परिचालन में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है.

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पत्थरबाजी करने वालों की पहचान होने पर उनके खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की जायेगी.

बेवजह चेन पुलिंग भी अपराध

जागरूकता अभियान के दौरान चेन पुलिंग को लेकर भी ग्रामीणों और यात्रियों को जानकारी दी गयी.

अधिकारियों ने बताया कि बिना उचित कारण ट्रेन की चेन खींचना गंभीर अपराध है. इससे ट्रेन अनावश्यक रूप से रुक सकती है और रेल परिचालन प्रभावित होता है.

आपात स्थिति में चेन पुलिंग का प्रावधान है, लेकिन बिना उचित कारण इसका इस्तेमाल करने पर कार्रवाई हो सकती है.

रेलवे सिग्नल और सुरक्षा उपकरणों से छेड़छाड़ पर नजर

आरपीएफ की ओर से रेलवे सिग्नल और अन्य सुरक्षा उपकरणों की सुरक्षा को भी अभियान में प्रमुखता से रखा गया.

अधिकारियों ने बताया कि इन उपकरणों से छेड़छाड़ रेल परिचालन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है. ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

किसी व्यक्ति द्वारा रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या सुरक्षा व्यवस्था में बाधा डालने की स्थिति में उसकी पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

ग्रामीणों की छोटी सी सूचना बचा सकती है बड़ा हादसा

रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को अधिकारियों ने खास तौर पर सतर्क रहने की अपील की. ट्रैक पर कोई संदिग्ध वस्तु दिखाई दे, रेलवे संपत्ति से छेड़छाड़ होती दिखे या कोई व्यक्ति संदिग्ध गतिविधि करता नजर आये, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित पुलिस या आरपीएफ को देने को कहा गया.

रेलवे सुरक्षा में स्थानीय लोगों की भागीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई ग्रामीण इलाकों में ट्रैक आबादी के काफी करीब से गुजरता है.

समय पर मिली सूचना से न केवल रेलवे संपत्ति की सुरक्षा हो सकती है, बल्कि यात्रियों की जान को भी खतरे से बचाया जा सकता है.

Jhajha Railway Safety: रेल साथी योजना का मकसद क्या है?

रेल साथी योजना के तहत इस तरह के जागरूकता अभियानों का उद्देश्य रेलवे सुरक्षा को लेकर आम लोगों को संवेदनशील बनाना और उन्हें सुरक्षा व्यवस्था का भागीदार बनाना है.

झाझा क्षेत्र में गिधौर, चौरा, सेवा समेत आसपास के गांवों में चलाये गये अभियान में जीआरपी और आरपीएफ के कई पुलिस पदाधिकारी और जवान मौजूद रहे. बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी अभियान में भाग लिया.

अधिकारियों ने उम्मीद जतायी कि जागरूकता बढ़ने से रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने और सुरक्षित रेल परिचालन में मदद मिलेगी.

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लेखक के बारे में

By ऋतांबर सिंह

ऋतांबर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. झाझा (जमुई) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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