जीविका से जुड़कर बदली सोनी कुमारी की जिंदगी. सिलाई, खेती और टोटो से हर महीने 20 हजार तक की आय

कभी परिवार चलाना मुश्किल था, पर जीविका से जुड़ने के बाद सोनी कुमारी ने खेती, सिलाई और टोटो व्यवसाय से अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी. अब वह ₹20 हजार प्रति माह कमाती हैं और गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं.

Success Story: जमुई सदर प्रखंड की लखनपुर पंचायत अंतर्गत बिक्रमपुर सिमरिया गांव की रहने वाली सोनी कुमारी ने मेहनत, आत्मविश्वास और जीविका के सहयोग से अपनी जिंदगी की तस्वीर बदल दी. कभी परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था, लेकिन आज खेती, सिलाई और टोटो व्यवसाय के जरिए वह परिवार की आर्थिक मजबूती की मिसाल बन चुकी हैं. गांव में उनकी पहचान अब एक सफल महिला उद्यमी के रूप में होती है.

जीविका से जुड़ने के बाद मिली नई दिशा

इंटर पास सोनी कुमारी की शादी पियुष कुमार सिंह से हुई. परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं. पति टोटो चलाते हैं, लेकिन सीमित आय से घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई संभालना कठिन था. करीब 12 वर्ष पहले सोनी जीविका के "गणेश" स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई. समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत, आर्थिक प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल की.

ऋण लेकर खेती शुरू की, बढ़ी आमदनी

सोनी ने जीविका समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर खेती में निवेश किया. मेहनत के दम पर खेती से अच्छी आय होने लगी. आर्थिक स्थिति सुधरने पर उन्होंने पति के लिए टोटो खरीदने में भी सहयोग किया, जिससे परिवार की आय का एक और स्थायी स्रोत तैयार हो गया.

सिलाई के हुनर को बनाया रोजगार

सोनी के पास पहले से सिलाई का हुनर था, लेकिन इसे व्यवसाय का रूप देने का अवसर नहीं मिला था. बाद में आरसेटी से सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी. वर्तमान में वह अपने घर पर सिलाई का काम करने के साथ पिछले एक वर्ष से स्वाभिमान जीविका सिलाई सेंटर में भी कार्यरत हैं.

अब हर महीने 20 हजार तक की आय

Success Story: खेती, सिलाई और टोटो व्यवसाय से परिवार की मासिक आय अब 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है. सोनी का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करना है. उनका कहना है कि अब बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पहले जैसी चिंता नहीं होती.

महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

सोनी कुमारी का कहना है कि जीविका ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का साहस भी दिया. आज गांव की महिलाएं उन्हें प्रेरणा के रूप में देखती हैं. उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अवसर, प्रशिक्षण और मेहनत के बल पर कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है और पूरे परिवार का भविष्य बदल सकती है.


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लेखक के बारे में

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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