जमुई से पंकज कुमार सिंह की रिपोर्ट : जमुई शहर स्थित द्वारका विवाह भवन में रविवार को बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोपगुट का जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डीसी रजक ने की. सम्मेलन का उद्घाटन महासंघ के पदाधिकारी प्रेमचंद कुमार सिन्हा, राज्य अध्यक्ष निरंजन कुमार सिन्हा, आवाम पत्रिका के प्रबंध संपादक मनोज कुमार यादव और बिहार राज्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कर्मचारी संघ के राज्य अध्यक्ष शशि भूषण आर्य समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया.
कर्मचारियों की एकजुटता पर दिया गया जोर
सम्मेलन में मौजूद नेताओं ने कर्मचारियों की एकजुटता को सबसे बड़ी ताकत बताया. राज्य स्तरीय नेताओं का अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया. वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा. कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों के विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया.
अन्याय के खिलाफ संघर्ष का लिया संकल्प
महासंघ के नेता प्रेमचंद कुमार सिन्हा ने कहा कि कर्मचारियों को अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी. उन्होंने शिक्षा विभाग के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य नेतृत्व कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए मजबूती से संघर्ष करेगा.पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारियों में उत्साह
राज्य अध्यक्ष निरंजन कुमार सिन्हा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसे महासंघ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा. वहीं शशि भूषण आर्य ने कर्मचारियों से पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर एकजुट रहने की अपील की. आवाम पत्रिका के प्रबंध संपादक मनोज कुमार यादव ने भी अपने संबोधन से कर्मचारियों में उत्साह भरने का काम किया.
शिक्षा सेवकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया
शिक्षा सेवक संघ के जिला अध्यक्ष प्रकाश बौद्ध ने शिक्षा सेवकों के स्थानांतरण, प्रोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति सहित कई मुद्दों को सम्मेलन में उठाया. उन्होंने कहा कि शिक्षा सेवकों के सम्मान और अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर बड़े आंदोलन की भी चेतावनी दी गई.वेतन भुगतान नहीं होने का लगाया आरोप
जिलाध्यक्ष डीसी रजक ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के हित में आवाज उठाने पर उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है. उन्होंने कहा कि शिक्षक दीपक कुमार और अजीत कुमार को उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद विद्यालय में योगदान देने के बाद भी वेतन नहीं दिया गया है. उन्होंने इस मामले में राज्य नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की.
