Guguldih School Building: जमुई के स्कूल में 89 बच्चे पढ़ते हैं. उन्हें पढ़ाने के लिए चार शिक्षक और एक शिक्षा सेवक तैनात हैं. भवन भी है और निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने की बात भी कही जा रही है. फिर भी प्राथमिक विद्यालय रविदास टोला गुगुलडीह में बच्चों को आज तक पूरा स्कूल भवन नहीं मिल सका है.
विद्यालय का पांच कमरों वाला भवन वर्षों से अधूरा पड़ा है. छत की ढलाई के बाद निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ा. प्लास्टर, रंग-रोगन और खिड़की-दरवाजे का काम भी अधूरा है. इसके लिए करीब आठ लाख रुपये की राशि स्वीकृत कराए जाने की बात कही जा रही है.
सवाल यह है कि जब भवन के लिए राशि और व्यवस्था होने की बात कही जा रही है, तो आखिर वर्षों से निर्माण पूरा क्यों नहीं हो सका?
छत ढली, लेकिन स्कूल भवन की कहानी वहीं रुक गयी
प्राथमिक विद्यालय रविदास टोला गुगुलडीह की सबसे बड़ी समस्या अधूरा कक्षा भवन है. पांच कमरों वाले भवन की छत की ढलाई हो चुकी है, लेकिन इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ा.
भवन में प्लास्टर, रंग-रोगन और खिड़की-दरवाजे लगाए जाने का काम बाकी है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इन कामों के लिए करीब आठ लाख रुपये की राशि स्वीकृत कराए जाने की बात कही गयी थी.
इसके बावजूद साल दर साल गुजरते गये और भवन अधूरा ही रह गया.
इसका सीधा असर उन बच्चों पर पड़ रहा है, जिनके लिए यह भवन बनाया जाना था. बेहतर शैक्षणिक माहौल की उम्मीद में स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को आज भी अधूरे निर्माण की समस्या के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है.
89 बच्चे, पांच शिक्षक, लेकिन सुविधाएं अधूरी
विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 89 बच्चे नामांकित हैं. इन बच्चों की पढ़ाई के लिए दो पुरुष शिक्षक, दो महिला शिक्षक और एक शिक्षा सेवक तैनात हैं.
यानी बच्चों को पढ़ाने के लिए मानव संसाधन मौजूद है, लेकिन विद्यालय की बुनियादी सुविधाएं सवालों के घेरे में हैं.
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हैं और शिक्षक भी तैनात हैं, तो भवन और दूसरी जरूरी सुविधाओं का निर्माण समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
दो लाख का रसोईघर बना, लेकिन छत आज तक नहीं
विद्यालय की परेशानी सिर्फ कक्षा भवन तक सीमित नहीं है. बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने वाला रसोईघर भी वर्षों से अधूरा पड़ा है.
करीब दो लाख रुपये की लागत से बने रसोईघर की दीवारों में अब दरारें आ चुकी हैं. इसके बावजूद इसकी छत की ढलाई तक नहीं हो सकी है.
रसोईघर अधूरा रहने के कारण रसोइयों को विद्यालय के ही एक कमरे में मध्याह्न भोजन तैयार करना पड़ता है.
इस व्यवस्था से एक तरफ बच्चों की पढ़ाई के लिए उपलब्ध जगह प्रभावित होती है, वहीं दूसरी तरफ भोजन तैयार करने में भी परेशानी होती है. यानी जिस सुविधा के लिए अलग रसोईघर बनाया गया था, उसका उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पा रहा है.
स्कूल की संपत्ति भी सुरक्षित नहीं, चार महीने पहले चोरी
गुगुलडीह स्कूल की समस्या यहां खत्म नहीं होती. विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है.
विद्यालय में पहले भी चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं. करीब चार महीने पहले अज्ञात चोर स्कूल से मोटर का स्टार्टर और विभाग की ओर से भेजे गये उपकरणों का सामान चोरी कर ले गये.
घटना के संबंध में प्रभारी प्रधानाध्यापक की ओर से मामला दर्ज कराया गया है.
ऐसे में सवाल सिर्फ चोरी का नहीं है. जब सरकारी स्कूल की संपत्ति ही सुरक्षित नहीं है, तो बच्चों और विद्यालय की दूसरी जरूरी सामग्री की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
पूर्व प्रधानाध्यापक ने कहा- राशि कम मिलने से अटका काम
भवन निर्माण अधूरा रहने के कारण को लेकर पूर्व प्रधानाध्यापक ललन राम ने अपनी बात रखी.
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से भेजी गयी राशि से भवन निर्माण का काम कराया जा रहा था. उनके अनुसार, प्राक्कलित राशि के अनुरूप पैसा नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य अधूरा रह गया.
यदि राशि की कमी ही निर्माण रुकने की वजह थी, तो फिर शेष राशि उपलब्ध कराने और काम पूरा कराने के लिए अब तक क्या कदम उठाये गये, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा.
वर्तमान प्रधानाध्यापक बोले- पहले के कार्यकाल में हुआ था निर्माण
वर्तमान प्रधानाध्यापक प्रभात रंजन ने बताया कि भवन निर्माण उनके पूर्व प्रधानाध्यापक के कार्यकाल में कराया जा रहा था.
उन्होंने कहा कि भवन का काम अधूरा क्यों रह गया, इस संबंध में वह कुछ नहीं कह सकते.
इस तरह भवन निर्माण को लेकर जिम्मेदारी पूर्व और वर्तमान व्यवस्था के बीच बंटी हुई नजर आ रही है. लेकिन बच्चों के लिए भवन कब पूरा होगा, इसका जवाब अभी स्पष्ट नहीं है.
अब टीम करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने जांच कराने की बात कही है.
उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए टीम का गठन किया जाएगा. जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
अब जांच टीम के सामने केवल अधूरे भवन का सवाल नहीं होगा. रसोईघर की स्थिति, राशि के इस्तेमाल, निर्माण कार्य के रुकने की वजह और विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था समेत पूरे मामले की जांच महत्वपूर्ण होगी.
Guguldih School Building: पूरा स्कूल आखिर कब मिलेगा?
गुगुलडीह स्कूल की तस्वीर केवल अधूरे भवन और रसोईघर की कहानी नहीं है. यह सवाल भी है कि सरकारी योजनाओं के तहत स्वीकृत निर्माण कार्य जमीन पर समय पर क्यों नहीं पूरे हो पाते.
89 बच्चे रोज स्कूल पहुंचते हैं. उनके लिए शिक्षक हैं, पढ़ाई है और सरकारी योजनाएं भी हैं. लेकिन बुनियादी ढांचा अधूरा है.
अब जिला शिक्षा विभाग ने जांच का भरोसा दिया है. लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद सिर्फ जिम्मेदारी तय होगी या वर्षों से अधूरे पड़े भवन और रसोईघर को वास्तव में पूरा भी कराया जाएगा.
