15 साल बाद भी भवन विहीन है गोबरदाहा का स्कूल, पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

Gobardaha School : आदिवासी बहुल गांव में खुले आसमान के नीचे चल रही पढ़ाई, भाकपा माले ने भवन निर्माण नहीं होने पर सड़क पर क्लास लगाने की दी चेतावनी

जमुई से पंकज कुमार सिंह की रिपोर्ट

Gobardaha School : चकाई प्रखंड की पोझा पंचायत स्थित आदिवासी बहुल गोबरदाहा (सरजम बेड़ा) गांव में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है. वर्ष 2010 से संचालित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय आज तक अपने भवन से वंचित है. करीब 15 वर्षों से बच्चे कभी छतदार चबूतरे पर तो कभी पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. बरसात और तेज धूप के दौरान पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित होती है.

पेड़ और चबूतरे पर चल रही कक्षाएं

विद्यालय भवन नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों की कक्षाएं खुले आसमान के नीचे संचालित की जा रही हैं. बच्चों ने बताया कि बारिश होने पर किताबें भीग जाती हैं और गर्मी के दिनों में तेज धूप के कारण पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है. इससे नियमित पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं.

भाकपा माले नेताओं ने किया निरीक्षण

Gobardaha School : शुक्रवार को भाकपा माले नेता मनोज पाड़े और आदिवासी किसान नेता कालू मरांडी ने गांव पहुंचकर विद्यालय की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं.

बुनियादी सुविधाओं के अभाव का आरोप

निरीक्षण के बाद भाकपा माले नेता मनोज पाड़े ने कहा कि आजादी के आठ दशक बाद भी गोबरदाहा गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय स्वीकृत होने के बावजूद भवन का निर्माण नहीं कराया गया. गांव तक पहुंचने का रास्ता भी दुर्गम है, बिजली के पोल लगे हैं लेकिन आपूर्ति नहीं होती और गांव में एक भी प्रधानमंत्री आवास का निर्माण नहीं हुआ है.

आंदोलन की चेतावनी

मनोज पाड़े ने चेतावनी दी कि यदि नवसृजित प्राथमिक विद्यालय गोबरदाहा का भवन निर्माण जल्द शुरू नहीं कराया गया तो भाकपा माले के बैनर तले स्कूली बच्चों के साथ चकाई मुख्यालय में सड़क पर कक्षा लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति बनने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.मौके पर तालो हेम्ब्रम, बिनय सोरेन, चुड़ा मुर्मू, बैजनाथ हेम्ब्रम सहित काफी संख्या में ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे.

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By Pintu Pranav

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