सिमुलतला में रुके एक्सप्रेस ट्रेनें, उपलब्ध हो हुनर व रोजगार के अवसर

एक समय ''बिहार का मीनी शिमला'' कहे जाने वाले सिमुलतला की तस्वीर बदलने की मांग अब जोर पकड़ रही है.

जमुई. एक समय ””बिहार का मीनी शिमला”” कहे जाने वाले सिमुलतला की तस्वीर बदलने की मांग अब जोर पकड़ रही है. रविवार को खुरंडा पंचायत के सुहाना ग्राम संगठनग्की ओर से आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुटीं महिलाओं ने एकजुट होकर विकास की राह में सिमुलतला स्टेशन पर सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग की. महिलाओं का कहना है कि ट्रेनें न रुकने से यात्रियों को झाझा या जमुई जाकर चढ़ना-उतरना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों का नुकसान होता है. उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द ठहराव सुनिश्चित कराने की अपील की.

सरकार दे तकनीकी प्रशिक्षण, खुले फैक्ट्रियां

कार्यक्रम के दौरान सरैया गांव, की महिलाओं ने लैपटॉप/टैब की मांग की ताकि इंटर पास लड़कियों को पढ़ाई में सुविधा मिल सके. वहीं वार्ड 9 की महिलाओं ने श्रमिक पलायन पर चिंता जताते हुए जिले में फैक्ट्री लगाने की अपील की. पालना घर की भी जोरदार मांग उठी ताकि कामकाजी महिलाएं निश्चिंत होकर अपने बच्चों की देखभाल कर सकें

दो लाख से अधिक महिलाओं की रही सहभागिता

डीपीआरो भानु प्रकाश ने बताया कि जिले में जीविका द्वारा संचालित महिला संवाद कार्यक्रमों में अब तक 2 लाख 8 हजार से अधिक महिलाएं और 17 हजार से अधिक पुरुष भाग ले चुके हैं. रोजाना 22 स्थलों पर दो पालियों में चल रहे इस कार्यक्रम में महिलाओं को एलईडी माध्यम से योजनाओं की जानकारी दी जा रही है.

तकनीकी शिक्षा से जुड़े रोजगार की मांग

महिलाओं ने सरकार से ब्यूटीशियन कार्य, सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर, डिजिटल लाइब्रेरी जैसे तकनीकी प्रशिक्षण मुफ्त देने की मांग की, ताकि वे स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सके. उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रशिक्षण शुरू किए जाये, तो हजारों महिलाओं को आजीविका का मजबूत जरिया मिल सकता है. इसके साथ ही महिलाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, जलजमाव, वृद्धावस्था पेंशन, सोलर लाइट, सामुदायिक भवन, रोजगार और सिंचाई जैसे मुद्दों पर भी खुलकर बात की. उन्होंने सुझाव दिया कि पलायन रोकने के लिए जिले में लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए.

जीविका से बदली जिंदगी

कार्यक्रम में कई महिलाओं ने कहा कि जीविका से जुड़ने के बाद उन्होंने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी, बल्कि समाज में सम्मान भी मिला.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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