जलाशय के नाम पर पांच दशक पहले विभाग ने ली जमीन, न हुआ निर्माण व न ही मिला मुआवजा

प्रखंड क्षेत्र के बटिया के कटहराटांड़ स्थित बरनार जलाशय के निर्माण को लेकर पांच दशक पूर्व वहां के किसानों की रैयती उपजाऊ जमीन जल संसाधन विभाग ने ली थी

सोनो.

प्रखंड क्षेत्र के बटिया के कटहराटांड़ स्थित बरनार जलाशय के निर्माण को लेकर पांच दशक पूर्व वहां के किसानों की रैयती उपजाऊ जमीन जल संसाधन विभाग ने ली थी. लेकिन पांच दशक बाद भी किसानों को न तो मुआवजा मिला, न जलाशय बना और न ही किसानों को वापस जमीन दी गयी. कटहराटांड़ गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने योजना के नाम पर लगभग पांच एकड़ उनकी रैयती जमीन पिछले 50 साल से अपने अंडर रखा है. उपजाऊ खेत दशकों से गिट्टी-बोल्डर और मेटल के अवशेष से ढके पड़े हैं. कटहराटांड़ निवासी पूर्व पंचायत समिति सदस्य रविंद्र मंडल, नंदलाल मंडल, सुनील कुमार, नागेश्वर मंडल, उपेंद्र कुमार, पंकज कुमार, जितेंद्र कुमार, महेंद्र कुमार और गणेश मंडल समेत कई किसानों ने कहा कि वर्ष 1974 में योजना का शिलान्यास होते ही गंदर मौजा के खाता संख्या 94, खसरा संख्या 1481, 1469, 2470 और 1476 पर विभाग ने कब्जा कर लिया और उस पर निर्माण से संबंधित सामग्रियों को रखा जाने लगा. किसानों का कहना है कि उस समय से लेकर अब तक न तो मुआवजा मिला और न ही जलाशय का बंद पड़ा निर्माण कार्य आगे बढ़ा. खेतों में गिट्टी-बोल्डर के अवशेष पड़े रहने से उपजाऊ जमीन बंजर के समान हो गई है. पांच दशक से खेत पर खेती नहीं कर पा रहे हैं. जमीन भी खाली नहीं की जा रही है. ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द मुआवजा नहीं मिला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे. जल संसाधन विभाग सिंचाई प्रमंडल झाझा के कार्यपालक अभियंता दीपक प्रधान ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है. अगर सरकार की ओर से मुआवजा का कोई प्रावधान होगा तो किसानों को जरूर मिलेगा.

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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