भक्ति व त्याग के अद्भुत उदाहरण हैं भ्राता भरत

आज भाई-भाई की संपत्ति को बांटने में लगा है विपत्ति को नहीं : गौरांगी गौरी जी

सिकंदरा. प्रखंड क्षेत्र स्थित नेतुला धाम कुमार में नौ दिवसीय रुद्रचंडी महायज्ञ जारी है. इसमें जारी संगीतमय श्रीराम कथा के छठे दिन शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय कथा वाचिका पंडित गौरांगी गौरी जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम विवाह का प्रसंग सुनाया. संगीतमय श्रीराम कथा के छठे दिन कथा शुरू करने से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यास पीठ का पूजन व आरती की गयी. आरती के बाद श्री अयोध्या धाम से पधारीं मर्मज्ञ कथा वाचिका पंडित गौरांगी गौरी जी ने राम विवाह एवं राम वन गमन का प्रसंग सुनाया. पंडित गौरांगी गौरी जी ने भगवान श्रीराम द्वारा धनुष भंग, परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं श्री राम विवाह, राम वन गमन एवं केवट से जुड़े प्रसंग का वर्णन से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया. इस दौरान दशरथ राज कुमार नजर तोहे लग जायेगी एवं मिथिला नगरिया निहाल सखियां भजन पर श्रद्धालु जमकर झूमे. कथा में आगे बढ़ते हुए पंडित गौरांगी ने कहा कि राम विवाह एक आदर्श विवाह है. राजा दशरथ, राजा जनक, राम व सीता की तुलना करते हुए बताया है कि ऐसे समधी, ऐसा नगर, ऐसा दुल्हा, ऐसी दुल्हन कि तीनों लोक में कोई बराबरी नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि विश्वामित्र श्रीराम को जनकपुरी की ओर ले गये, जहां पर सीता स्वयंवर चल रहा था. राजा जनक ने अपनी बेटी के स्वयंवर के लिए एक प्रतिज्ञा रखी कि जो शिव धनुष का खंडन करेगा वही सीता से नाता जोड़ेगा. श्रीराम ने विश्वामित्र की आज्ञा पाकर धनुष को तोड़ दिया. इस दौरान उन्होंने कथा एवं भजन के माध्यम से सीता स्वयंवर एवं लक्ष्मण-परशुराम संवाद को सुना कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया. कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए पंडित गौरांगी गौरी जी ने कहा कि धनुष भांग होने के उपरांत राजा जनक ने राजा दशरथ को बरात लाने का न्यौता भेजा व राजा दशरथ नाचते-गाते हर्षित होकर बरातियों समेत जनकपुरी पहुंचे. उन्होंने कहा कि जनकपुर से जब सीताजी की विदाई हुई तब उनके माता-पिता ने उन्हें ससुराल में कैसे रहना है इसकी सीख दी. प्रत्येक माता-पिता को अपनी पुत्री के विवाह के समय ऐसी ही सीख देनी चाहिए.

कुसंगति होती है हानिकारक

आगे कथा में श्रीराम वनगमन का वर्णन करते हुए पूज्य पंडित गौरांगी गौरी ने कहा कि राम और भरत ने संपत्ति का बंटवारा नहीं किया बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया. राजा दशरथ ने कैकई को वचन तो दे दिया पर उसके बाद वे निःशब्द होकर रह गये. रघुकुल की मर्यादा के लिए उन्होंने अपने प्रिय पुत्र का वियोग स्वीकार कर लिया. कथा व्यास ने कुसंगति को हानिकारक बताया. कहा कि मंथरा दासी की कुसंगति के कारण ही कैकई की मति मारी गयी और उसने राम के राज्याभिषेक से ठीक पहले उनके लिए वनवास मांग लिया. श्रीराम ने पिता के वचन का मान व कुल की मर्यादा रखने के लिए इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया और वन को प्रस्थान किया. इस दौरान राम वन गमन के मार्मिक प्रसंग को सुन कर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गयी.

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By Prabhat Khabar News Desk

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