अरवल घटना के विरोध में जमुई सदर अस्पताल में ओपीडी ठप: बिना इलाज लौटे 70 से अधिक मरीज

अरवल सदर अस्पताल में हुई घटना के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर जमुई सदर अस्पताल में OPD सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं. इलाज की उम्मीद लेकर आए दर्जनों मरीजों को निराश लौटना पड़ा. हालांकि, इमरजेंसी सेवा सामान्य रूप से संचालित होती रही.

अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट और अमर्यादित व्यवहार के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (बासा) के आह्वान पर बुधवार को जमुई सदर अस्पताल में ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं. सुबह से ही ओपीडी कक्षों के बाहर ताला लटका रहा और सन्नाटा पसरा रहा. इलाज की उम्मीद लेकर आए दर्जनों मरीजों को बिना डॉक्टरी सलाह के ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ा. हालांकि, राहत की बात यह रही कि अस्पताल की इमरजेंसी सेवा सामान्य रूप से संचालित होती रही.

70 मरीजों ने कटवाई पर्ची, फिर भी नहीं मिले डॉक्टर

अस्पताल परिसर में सुबह से ही मरीजों और उनके परिजनों की कतार लगनी शुरू हो गई थी:

  • पर्चा कटने के बाद मिली जानकारी: हड़ताल की पूर्व सूचना न होने के कारण निबंधन काउंटर से लगभग 70 मरीजों ने ओपीडी की पर्ची कटवाई. बाद में जब पता चला कि डॉक्टर कक्ष में मौजूद नहीं हैं, तो उन्हें निराशा हाथ लगी.
  • सुदूर गांवों से पहुंचे थे मरीज: गरसंडा की सबिता देवी, अमरथ की ललिता देवी, लठाने के बिजेंद्र दूबे, सिकहेरिया के ललन सिन्हा और महाराजगंज के रोहित कुमार समेत कई मरीजों ने बताया कि वे बुखार, सर्दी, खांसी जैसी बीमारियों का इलाज कराने आए थे. सरकारी अस्पताल में डॉक्टर न मिलने से कई मरीजों को महंगे निजी क्लीनिक जाने पर मजबूर होना पड़ा.

क्या है पूरा मामला?

अरवल सदर अस्पताल में बीते शुक्रवार को फखरपुर निवासी रागिनी कुमारी की सिजेरियन डिलीवरी के दौरान मौत हो गई थी:

  1. हंगामा व मारपीट: घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और सिविल सर्जन के साथ मारपीट की.
  2. FIR दर्ज: मामले में पूर्व विधायक महानंद सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई.
  3. मांगें पूरी न होने पर आक्रोश: डॉक्टरों ने दोषियों की त्वरित गिरफ्तारी, सिविल सर्जन को सुरक्षा गार्ड, और अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी की मांग की थी. 4 दिन बीत जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने पर 'बासा' ने पूरे बिहार में ओपीडी बहिष्कार का फैसला लिया.

इमरजेंसी सेवा से मिली राहत

ओपीडी सेवाएं बंद रहने से जहां सामान्य बीमारियों के मरीजों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ा, वहीं सदर अस्पताल की इमरजेंसी सेवा निर्बाध रूप से चालू रही. दुर्घटना में घायल लोगों, गंभीर रोगियों और आपातकालीन मामलों का इलाज चिकित्सकों द्वारा नियमित रूप से किया जाता रहा.


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