गिद्धौर : गिद्धौर के प्राचीन एवं एेतिहासिक लोक आस्था का धाम बाबा कोकिलचंद धाम गंगरा में ग्राम्य सोमवारी महाआरती के अनवरत 11 वर्ष पूर्ण होने की खुशी में वार्षिक महाआरती का आयोजन किया गया. इस अवसर पर गंगरा गांव के दर्जनों श्रद्धालु भक्तों ने बाबा कोकिलचंद दरबार में माथा टेक अरदास किया एवं बाबा की महाआरती की.
ग्राम्य सामूहिक सोमवारी महाआरती का हुआ 11 वर्ष
गिद्धौर : गिद्धौर के प्राचीन एवं एेतिहासिक लोक आस्था का धाम बाबा कोकिलचंद धाम गंगरा में ग्राम्य सोमवारी महाआरती के अनवरत 11 वर्ष पूर्ण होने की खुशी में वार्षिक महाआरती का आयोजन किया गया. इस अवसर पर गंगरा गांव के दर्जनों श्रद्धालु भक्तों ने बाबा कोकिलचंद दरबार में माथा टेक अरदास किया एवं बाबा की […]

वहीं इस महाआरती के ग्यारह वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में विधिवत सत्यनारायण व्रत कथा पूजन का भी आयोजन हुआ. इस अवसर पर ऋषिकेश हरिद्वार से पधारे संत के मुखार बिंद से प्रवचन सुनकर ग्रमीण श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए. महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया.
इस अवसर पर इच्छुक श्रद्धालुओं ने अपने समस्त परिवार के मंगलकामना एवं मनवांक्षित फल की प्राप्ति हेतु बाबा दरबार की आरती पूजन में सामिल होकर बहुत ही शौभाग्य शाली महसूस किया. बाबा कोकिलचंद की प्रेरणा से 108 फिट ऊंचाई तक मंदिर का निर्माण क्षेत्र वासियों एवं श्रद्धालु के अंशदान से करवाया जा रहा है. बताते चलें कि बाबा कोकिलचंद ने ही अपनी आलोकिक शक्ति से गिद्धौर के तत्कालीन माहाराजा हरि सिंह को जहांगीर के कैदगृह से मुक्त कराया था.
जब हरि सिंह को इसका एहसास हुआ तो उन्होने बाबा को अपना इष्ट देव के रुप में पूजा आर्चना शुरू की व गंगरा गांव में 18 बीघा जमीन सेवायती के रुप दान देकर बाबा कोकिलचंद पिंड स्थापित करवाकर एक मंडप का निर्माण करवाया था. तब से लेकर आज तक बाबा कोकिलचंद की पूजा अर्चना बहुत ही धुमधाम से यहां अनवरत जारी है.
बाबा ने क्षेत्र की समृद्धि व खुशहाली के लिए सामाजिक उत्थान से जुड़े तीन सूत्र शराब से दूर रहना, नारी का सम्मान करना,अन्न की राक्षा करना की चेतना लोगों में जगायी. ग्रामीण बताते हैं कि बाबा के ग्राम्य सामुहिक सोमवारी आरती में भाग लेने से लोगों में समाजिक सदभाव, एकता आत्मशुद्धि एवं शांति मिलती है